Jio का रिकॉर्ड IPO: एलन मस्क से जंग और कर्ज मुक्ति की तैयारी
एलन मस्क की स्टारलिंक से खींचतान और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रिलायंस जियो देश के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ लाने जा रही है. 108 अरब डॉलर से अधिक के मूल्यांकन के साथ यह मेगा लिस्टिंग भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने को तैयार है.
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) जल्द ही दस्तक देने जा रहा है. उद्योगपति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार इकाई, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स, 3.2 अरब डॉलर का अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है. यह आईपीओ न केवल भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती का परीक्षण करेगा, बल्कि देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी में निवेशकों के भरोसे को भी रेखांकित करेगा.
इस मेगा लिस्टिंग को लेकर वैश्विक और घरेलू संस्थागत निवेशकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है. सिंगापुर के जीआईसी, ब्लैकरॉक और फिडेलिटी जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की ओर से एंकर निवेशकों के लिए आरक्षित कोटे से करीब तीस गुना अधिक बोलियां प्राप्त होने की खबर है, जो कंपनी की बाजार स्थिति को साबित करती है.
वैश्विक उथल-पुथल और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच बड़ा दांव
जियो का यह आईपीओ ऐसे समय में आ रहा है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है. मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और उच्च वैश्विक ब्याज दरों की वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय द्वितीयक बाजार से भारी पूंजी निकाली है. इसके बावजूद, जियो का लक्ष्य 108 अरब डॉलर से अधिक का मूल्यांकन हासिल करना है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि द्वितीयक बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी का जियो के प्राथमिक बाजार पदार्पण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा.
घरेलू म्यूचुअल फंडों के माध्यम से भारतीय बाजारों में हो रहे निरंतर और मजबूत निवेश ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया है, जिससे जियो के इस शेयर प्रस्ताव को सुरक्षा चक्र मिला हुआ है.
कर्ज में भारी कटौती और वित्तीय मजबूती की दिशा में कदम
विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों का आकलन है कि इस आईपीओ की सफलता से रिलायंस जियो के नकदी प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. हालांकि, जुटाई गई पूंजी का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर पारंपरिक दूरसंचार सेवाओं के विस्तार या उपग्रह नेटवर्क के विकास के लिए आरक्षित नहीं है. जुटाए गए फंड का लगभग नब्बे प्रतिशत हिस्सा कंपनी का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा.
इससे कंपनी के सालाना ब्याज के बोझ में 20 अरब से 25 अरब भारतीय रुपये की बड़ी कमी आने का अनुमान है. कर्ज का स्तर कम होने से कंपनी का फ्री कैश फ्लो मजबूत होगा और एक सूचीबद्ध कंपनी के रूप में जियो के पास भविष्य में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त पूंजी जुटाने का एक मजबूत माध्यम भी उपलब्ध हो जाएगा.
उपग्रह इंटरनेट की होड़ और स्टारलिंक से सीधी टक्कर
यह आईपीओ ऐसे मोड़ पर आया है जब मुकेश अंबानी और एलन मस्क के बीच रणनीतिक खींचतान तेज हो गई है. एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्वामित्व वाली स्टारलिंक भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रही है, जिसको लेकर दोनों दिग्गजों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है. हालांकि, रिलायंस ने किसी भी तरह के प्रतिस्पर्धात्मक डर से इनकार किया है. जियो खुद 1,600 लो-अर्थ-ऑर्बिट उपग्रहों का एक विशाल नेटवर्क स्थापित करने की योजना बना रही है, जिसके तकनीकी ढांचे को भारत के अंतरिक्ष नियामक इन-स्पेस से मंजूरी मिल चुकी है.
यद्यपि मस्क की स्टारलिंक के पास वैश्विक स्तर पर हजारों उपग्रहों का अनुभव है, लेकिन भारत में जियो की वास्तविक ताकत उसका मजबूत वितरण नेटवर्क और 50 करोड़ से अधिक का विशाल ग्राहक आधार है. आने वाले समय में उपग्रह संचार और पारंपरिक नेटवर्क का संयोजन भारतीय दूरसंचार बाजार की दिशा तय करेगा.