बलरामपुर आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती फर्जीवाड़ा: 10वां आरोपी विष्णु यादव गिरफ्तार
शंकरगढ़ विकासखंड में जाली मार्कशीट के सहारे आंगनबाड़ी सहायिका बनने और भर्ती कराने वाले बड़े नेटवर्क पर पुलिस की गाज गिरी है. फरार आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया है.
बलरामपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से सामने आए चर्चित आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती फर्जीवाड़े में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है. एकीकृत बाल विकास परियोजना कुसमी की प्रभारी अधिकारी द्वारा अगस्त 2025 में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद से ही पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है.
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शंकरगढ़ विकासखंड में कूटरचित और फर्जी अंकसूचियों का सहारा लेकर नियुक्तियां हथियाई गईं, जिसके पीछे एक सुसंगठित आपराधिक गिरोह का हाथ था. इसी कड़ी में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए घटना के बाद से लगातार चकमा दे रहे आरोपी विष्णु यादव (33 वर्ष) को 18 अक्टूबर को धर दबोचा और अदालत में पेश करने के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया.
बलरामपुर पुलिस की तफ्तीश में यह साफ हो चुका है कि यह केवल एक-दो फर्जी मार्कशीट का मामला नहीं, बल्कि जाली दस्तावेज तैयार कर अवैध तरीके से नौकरियां दिलाने वाला एक संगठित नेटवर्क था.
शंकरगढ़ थाने में मामला सामने आने के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज बनाने, षड्यंत्र रचने और संगठित अपराध जैसी गंभीर धाराओं—318(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 111—के तहत अपराध क्रमांक 115/2025 दर्ज किया गया था.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाने वाले इस गिरोह के खिलाफ वैधानिक प्रक्रिया पूरी सख्ती के साथ आगे भी जारी रहेगी.
गौरतलब है कि फर्जी दस्तावेज रैकेट पर पुलिस का शिकंजा काफी समय से कस रहा था. इससे पहले अगस्त 2025 में ही पुलिस ने इस सिलसिले में त्वरित कार्रवाई करते हुए नौ आरोपियों—सुशीला सिंह, अरमाना, रिजवाना, प्रियंका यादव, उमाशंकर पैकरा, शिवनारायण, आबिद अंसारी, समसुद्दीन अंसारी और सहीना परवीन—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.
विष्णु यादव इस मामले में मुख्य फरार आरोपियों में शामिल था, जिसकी गिरफ्तारी के साथ ही अब तक सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपियों की संख्या 10 हो गई है.