सरकार ने चीनी और गन्ने के रस से इथेनॉल बनाने पर लगाई रोक
घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत और बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 2026-27 आपूर्ति वर्ष हेतु गन्ने से बने इथेनॉल की खरीद पर रोक लगा दी है. अब पेट्रोल में 20% मिश्रण का लक्ष्य मुख्य रूप से मक्का और अनाज आधारित इथेनॉल से पूरा किया जाएगा.
नई दिल्ली । डेस्क: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आगामी 2026-27 आपूर्ति वर्ष के लिए पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की खरीद प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. देश में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से गन्ने के रस, शुगर सिरप और B-हेवी मोलासेस से बने इथेनॉल की खरीद पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा जारी 11 अरब लीटर इथेनॉल के टेंडर के अनुसार, इस बार केवल मक्का, टूटे चावल, एफसीआई के अधिशेष चावल और C-हेवी मोलासेस से बने इथेनॉल के लिए ही बोलियाँ आमंत्रित की गई हैं.
इसके अलावा, सरकार ने मक्का आधारित इथेनॉल पर दिए जाने वाले प्रोत्साहन को घटाते हुए इसकी खरीद कीमत 71.86 रुपये से कम करके 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी है.
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण चीनी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में सरकार का यह कदम देश में खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) के लक्ष्य को अनाज आधारित इथेनॉल के सहारे आगे बढ़ाने की रणनीति को दर्शाता है. यह नई व्यवस्था नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक लागू रहेगी.