UAPA के तहत आरोपी होने पर भी विदेश यात्रा पर पूर्ण रोक नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले की आरोपी नताशा नरवाल को यूके (ब्रिटेन) जाने की अनुमति दे दी है. अदालत ने कहा कि UAPA के तहत मामला होने का मतलब विदेश यात्रा पर पूरी तरह से रोक लगाना नहीं है.
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले में आरोपी और पिंजरा तोड़ कार्यकर्ता नताशा नरवाल को बड़ी राहत दी है. अदालत ने उन्हें अपने पीएचडी सुपरवाइजर्स से मुलाकात करने और अकादमिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए यूके (ब्रिटेन) जाने की इजाजत दे दी है.
ट्रायल कोर्ट के 6 अक्टूबर के उस फैसले को खारिज करते हुए, जिसमें यात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था, जस्टिस अमित बंसल की पीठ ने 16 अक्टूबर को यह आदेश सुनाया. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में एक बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज गंभीर मामले भी किसी व्यक्ति के विदेश जाने के मौलिक अधिकार पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सकते.
अदालत ने नताशा नरवाल को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और उनके भाई की ज़मानत पर यात्रा करने की अनुमति दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने यह शर्त भी रखी है कि वह ब्रिटेन में राजनीतिक शरण (Asylum) की मांग नहीं करेंगी और न ही अपने खिलाफ लंबित मामलों पर कोई बयानबाजी करेंगी.
गौरतलब है कि नताशा नरवाल ब्रिटेन की 'यूनिवर्सिटी ऑफ वॉरविक' से पीएचडी कर रही हैं. उन्होंने लंदन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन में शामिल होने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगी थी, जहां उनका शोध पत्र स्वीकृत हुआ है. इसके अलावा, वह अपने पीएचडी सुपरवाइजर्स से आमने-सामने मुलाकात और विश्वविद्यालय में शोध से संबंधित गतिविधियों में भाग लेना चाहती थीं.
पुलिस और राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि नरवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी अकादमिक गतिविधियों में शामिल हो सकती हैं, और ब्रिटेन जाने पर उनके वहां शरण मांगने का जोखिम हो सकता है.
तमाम तर्कों को सुनने के बाद, हाई कोर्ट ने पाया कि नताशा अक्टूबर 2023 से ऑनलाइन माध्यम से अपनी पीएचडी की पढ़ाई कर रही हैं और उनके सुपरवाइजर्स ने खुद उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए आमंत्रित किया है.
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में अभी लंबा समय लग सकता है और जमानत मिलने के बाद से नताशा ने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है. इन्हीं वजहों को आधार बनाते हुए अदालत ने उनकी विदेश यात्रा की अर्जी को स्वीकार कर लिया.