अल्ट्रा-रिच परिवारों का संकट: 66% युवा वारिस बिजनेस संभालने को तैयार नहीं
दुनिया के अति-अमीर परिवारों के लिए राजनीतिक अनिश्चितता से भी बड़ी चिंता संपत्ति के हस्तांतरण को लेकर है. जूलियस बेयर और EY के सर्वेक्षण के अनुसार, अगली पीढ़ी के केवल 22.6% उत्तराधिकारी ही पारिवारिक व्यवसाय संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
सीजीखबर डेस्क । रायपुर: वैश्विक स्तर पर बेहद अमीर (अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ) परिवारों के लिए अपनी अकूत संपत्ति का उत्तराधिकार और उसका सुरक्षित हस्तांतरण राजनीतिक अस्थिरता से भी बड़ा चिंता का विषय बन गया है. स्विस प्राइवेट बैंक 'जूलियस बेयर' (Julius Baer) और उसके सहयोगी संगठन 'EY' द्वारा जारी किए गए नवीनतम 'फैमिली बैरोमीटर' (Family Barometer) सर्वेक्षण के निष्कर्षों से यह खुलासा हुआ है. इस सर्वेक्षण में दुनिया भर के 700 से अधिक वित्तीय सलाहकारों और पेशेवरों के उत्तरों का विश्लेषण किया गया, जो 5 करोड़ स्विस फ्रैंक (लगभग 6.07 करोड़ अमेरिकी डॉलर) या उससे अधिक की कुल संपत्ति वाले अति-समृद्ध परिवारों को वित्तीय और प्रबंधन सलाह देते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष वैश्विक समाज में अति-अमीर परिवारों के बीच उत्तराधिकार की समस्या एक पायदान ऊपर चढ़कर चिंता का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन गई है. इसने राजनीतिक स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण कारक को भी पीछे छोड़ दिया है. दुनिया भर के ये अमीर परिवार इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि खरबों डॉलर मूल्य का यह संपत्ति हस्तांतरण किस प्रकार पूरा होगा, क्योंकि उनकी अगली पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा इस भारी-भरकम जिम्मेदारी को उठाने के लिए अभी तैयार नजर नहीं आ रहा है.
अगली पीढ़ी की तैयारी और अरुचि का संकट
जूलियस बेयर के सर्वेक्षण में सबसे चौंकाने वाली बात अगली पीढ़ी के उत्तराधिकारियों की मानसिक और व्यावसायिक तैयारी को लेकर सामने आई है. सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि अगली पीढ़ी के केवल 22.6 प्रतिशत युवा वारिस ही अपने पारिवारिक व्यवसाय और संपत्ति की बागडोर पूरी तरह संभालने के लिए तैयार और सक्षम हैं.
दूसरी ओर, लगभग 66 प्रतिशत युवा उत्तराधिकारी ऐसे हैं जो इतने बड़े व्यावसायिक और वित्तीय हस्तांतरण के लिए तैयार नहीं हैं. इसके अलावा, 11.6 प्रतिशत युवाओं ने पारिवारिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने या उसमें शामिल होने में पूरी तरह से अनिच्छा जताई है. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जो परिवार अपनी संपत्ति के हस्तांतरण या व्यावसायिक बिक्री पर विचार कर रहे हैं, उनमें से केवल 2.3 प्रतिशत परिवारों ने ही माना कि वे इस प्रक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
जूलियस बेयर में 'फैमिली ऑफिस सॉल्यूशंस एंड एडवाइजरी एशिया' के प्रमुख क्रिस्टोस एनाग्नोस्टोपोलोस के अनुसार, अमीर परिवार इन व्यावहारिक सवालों का सामना कर रहे हैं—क्या अगली पीढ़ी व्यवसाय संभालने की इच्छा रखती है? क्या वे इसके लिए प्रशिक्षित और तैयार हैं? और यदि वे तैयार नहीं हैं, तो इसके लिए क्या वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध हो सकते हैं?
वेल्थ प्लानिंग बनी प्राथमिक आवश्यकता, टैक्स और कानूनी मुद्दे पीछे
हालांकि दुनिया भर के कई प्रमुख देशों में करोड़पतियों पर टैक्स का बोझ बढ़ रहा है, फिर भी परिवारों की प्राथमिक जरूरतों में संपत्ति का नियोजन सबसे ऊपर आ गया है. वैश्विक स्तर पर चीन और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों ने इस साल अति-अमीर लोगों पर कराधान को बढ़ाने के प्रयास तेज किए हैं, जिसके कारण कराधान अभी भी अति-अमीरों की मुख्य चिंताओं में शामिल है.
इसके बावजूद, परिवारों की व्यावहारिक और रणनीतिक आवश्यकताओं में 'वेल्थ प्लानिंग' यानी संपत्ति नियोजन का मुद्दा सबसे आगे रहा. 43 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि वेल्थ प्लानिंग उनकी सबसे बड़ी आवश्यकता है. यह आंकड़ा कानूनी और कर संबंधी समस्याओं (23.1 प्रतिशत) के मुकाबले लगभग दोगुना है, जो यह दर्शाता है कि कानून और टैक्स से अधिक प्राथमिकता परिवार के भविष्य और संपत्ति के प्रबंधन को दी जा रही है.
ट्रिलियन डॉलर का आगामी संपत्ति हस्तांतरण
आने वाले वर्षों में दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा संपत्ति हस्तांतरण देखने को मिलेगा. शोध संस्था 'वेल्थ एक्स' (Wealth X) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए जूलियस बेयर ने अनुमान जताया है कि वर्ष 2030 तक 5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की संपत्ति वाले अति-समृद्ध व्यक्तियों द्वारा कुल 15 ट्रिलियन (15 खरब) अमेरिकी डॉलर की संपत्ति अगली पीढ़ी को हस्तांतरित की जाएगी.
इतना ही नहीं, यूबीएस (UBS) की 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो दशकों (20 वर्षों) में वैश्विक स्तर पर 83 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक का धन हस्तांतरण होने का अनुमान है. चूंकि दुनिया भर में व्यावसायिक कंपनियों के संस्थापक अब उम्रदराज हो रहे हैं, इसलिए हाल के वर्षों में पारिवारिक फर्मों का स्वामित्व उनके बच्चों के हाथों में सौंपने का दौर तेजी से शुरू हो चुका है.
चीन में इस बदलाव के स्पष्ट उदाहरण देखने को मिल रहे हैं. हांग्जो स्थित पेय पदार्थ बनाने वाली दिग्गज कंपनी 'वाहाहा' (Wahaha), चेंगदू स्थित खनन कंपनी 'तियानची लिथियम' (Tianqi Lithium) और प्रसिद्ध मिर्च तेल निर्माता कंपनी 'लाओ गान मा' (Lao Gan Ma) जैसी बड़ी कंपनियों की कमान अब नई पीढ़ी के हाथों में आ चुकी है, जिस पर वैश्विक बाजार की पैनी नजर बनी हुई है.
संवाद की कमी और एशिया की स्थिति
रिपोर्ट में इस बात पर गहरा अफसोस जताया गया है कि इतने बड़े अंतर-पीढ़ीगत हस्तांतरण के बावजूद परिवारों के भीतर इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा नहीं हो रही है. सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 18.5 प्रतिशत मामलों में ही अगली पीढ़ी को संवाद की प्रक्रिया में "सक्रिय रूप से शामिल" पाया गया.
क्षेत्रीय स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है. सर्वेक्षण किए गए सभी क्षेत्रों में से एशिया में संपत्ति बिक्री के बाद के नियोजन (Post-sale planning) में नई पीढ़ी की भागीदारी का स्तर सबसे कम दर्ज किया गया, जहां केवल 8.4 प्रतिशत मामलों में ही अगली पीढ़ी सक्रिय रूप से चर्चा में शामिल थी.
स्विस बैंक की वेल्थ प्लानिंग प्रमुख मारिया यूजिना मोस्केरा के अनुसार, इस संकट से निपटने का एकमात्र रास्ता यही है कि पुरानी पीढ़ी अपनी नई पीढ़ी को उचित शिक्षा दे, उन्हें व्यावसायिक निर्णयों में धीरे-धीरे शामिल करे और सही मार्गदर्शन प्रदान करे. यही किसी भी परिवार के भविष्य और उसकी संपत्ति के लिए सबसे मूल्यवान निवेश साबित हो सकता है.