अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का जामनगर दौरा क्यों है खास?
अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भारत दौरा इस बार कूटनीतिक से अधिक व्यापारिक और ऊर्जा केंद्रित है. नई दिल्ली को छोड़ जामनगर रिफाइनरी जाना वैश्विक तेल बाजार, अमरीका में जारी ऊर्जा संकट और रूसी तेल पर भारत की निर्भरता से जुड़े कई बड़े संकेत देता है.
नई दिल्ली । डेस्क: अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो दो दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंचे हैं. इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि वह देश की राजधानी नई दिल्ली जाने के बजाय सीधे गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के विशाल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का रुख कर रहे हैं. उद्योगपति मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाला यह रिफाइनरी परिसर दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट क्रूड रिफाइनरी केंद्र है. वैश्विक तेल बाजार में रिलायंस की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है, और मौजूदा दौर में जब दुनिया में ऊर्जा संकट गहराया हुआ है, तब अमरीकी विदेश मंत्री का यह दौरा कई बड़े रणनीतिक संकेत देता है.
मुंबई से जामनगर तक का व्यापारिक एजेंडा
मुंबई में उद्योग जगत की हस्तियों से मुलाकात के बाद मार्को रुबियो गुजरात के जामनगर के लिए रवाना होंगे. कच्छ की खाड़ी के पास स्थित यह रिफाइनरी परिसर दैनिक 14 लाख बैरल कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता रखता है. भारत में अमरीका के राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, रुबियो का यह दौरा पूरी तरह से व्यावसायिक अवसरों, व्यापारिक निवेश और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है. जामनगर में रुबियो रिलायंस के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और कच्चे तेल के नए स्रोतों पर चर्चा करेंगे.
दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी की अहमियत
जामनगर में स्थित यह कॉम्प्लेक्स पूरी दुनिया की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग डेढ़ प्रतिशत हिस्सा संभालता है. वर्ष 1999 में स्थापित पहली इकाई और 2008 में चालू हुई विशेष आर्थिक क्षेत्र वाली निर्यात-उन्मुख इकाई को मिलाकर यह विशाल ढांचा तैयार हुआ है. यह रिफाइनरी भारी और उच्च सल्फर वाले कच्चे तेल को भी आसानी से परिष्कृत कर मूल्यवान ईंधनों में बदल सकती है. हाल ही में वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात में आई तेजी के पीछे भी जामनगर की क्षमता का बड़ा हाथ है. अमरीका अब वेनेजुएला के तेल प्रसंस्करण को बढ़ाने के लिए रिलायंस के साथ सहयोग का विस्तार करना चाहता है.
अमरीकी चुनाव और डीजल का संकट
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में रिलायंस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. अमरीका में आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले डीजल की आसमान छूती कीमतों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं. रिलायंस का मुख्य निर्यात उत्पाद डीजल ही है, जिसकी बड़ी खेप यूरोप के साथ-साथ अमरीकी बाजारों में भी भेजी जाती है. इसके अलावा, यूरोपियन यूनियन द्वारा रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भी जामनगर रिफाइनरी एक ऐसा केंद्र बनी हुई है, जहां से परिष्कृत उत्पाद यूरोपीय देशों तक आसानी से पहुंच रहे हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध और टैरिफ की राजनीति
रूस-यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत के बाद से भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार बनकर उभरा है और इसमें रिलायंस की हिस्सेदारी प्रमुख रही है. हालांकि, अमरीका द्वारा भारतीय सामानों पर दंडात्मक शुल्क लगाने की चेतावनियों के बाद रिलायंस ने रूसी तेल की खरीद में कटौती की है, फिर भी यह रिफाइनरी अमरीका की भू-राजनीतिक रणनीति के केंद्र में है. अमरीकी प्रशासन यह भली-भांति समझता है कि भारत जैसे मित्र देश के लिए रातों-रात अपनी ऊर्जा जरूरतों का ढांचा बदलना आसान नहीं है, इसीलिए अब अमरीका भारत को ऊर्जा के अन्य विकल्प मुहैया कराने पर जोर दे रहा है.
अमरीका में निवेश और कॉर्पोरेट खींचतान
एक तरफ रिलायंस अमरीका में नए रिफाइनरी प्रोजेक्ट्स और कम-कार्बन ऊर्जा पहलों में बड़ा निवेश कर रही है, तो दूसरी तरफ घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा भी गरमाई हुई है. हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के करीबी एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक को मंजूरी मिलने में हो रही देरी के लिए अप्रत्यक्ष रूप से रिलायंस के दूरसंचार एकाधिकार पर सवाल उठाए थे. इन तमाम तनातनियों और व्यापारिक गतिरोधों के बावजूद, मार्को रुबियो का जामनगर दौरा यह साबित करता है कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार के मोर्चे पर रिलायंस इंडस्ट्रीज अमरीका के लिए एक अपरिहार्य साझेदार बनी हुई है.