बुध, 21 अक्टू. 2026

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SBI के हजारों ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर लीक

साइबर सुरक्षा में सेंध के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने शेयर बाजारों को सूचित किया है कि डार्क वेब पर उसके ग्राहकों की जानकारी उजागर हुई है. हालांकि बैंक का कहना है कि मुख्य सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने ग्राहकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

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21 अक्टू. 2026, 02:44 PM 3 मिनट में पढ़ें 22

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नई दिल्ली । डेस्क: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में स्वीकार किया है कि डार्क वेब पर उसके ग्राहकों से संबंधित संदिग्ध डेटा मिलने के बाद प्राथमिक जांच में 3,897 ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी (PII) लीक होने की पुष्टि हुई है. इस घटना की भनक साइबर रक्षा एजेंसियों, CERT-In और थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर से मिलने के बाद बैंक ने तुरंत अपने साइबर इंसिडेंट रिस्पॉन्स और रोकथाम संबंधी प्रोटोकॉल को सक्रिय कर दिया है.

बैंक का दावा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड्स के शुरुआती विश्लेषण में यह सेंधमारी सामने आई है. इस लीक हुए डेटा में ग्राहकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, नाम, लिंग, ईमेल आईडी, घर का पता, शाखा विवरण और लोन आवेदन से जुड़े मेटाडेटा शामिल हैं. 

एसबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस घटना से बैंक के मुख्य परिचालन, वित्तीय प्रदर्शन या व्यावसायिक निरंतरता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और सभी बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से काम कर रही हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को जांच का जिम्मा सौंपा गया है.

वहीं दूसरी ओर, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने बैंक के रुख पर कड़ा एतराज जताया है. फाउंडेशन का कहना है कि बैंक ने स्वयं इस डेटा लीक का पता नहीं लगाया, बल्कि बाहरी एजेंसियों की सूचना के बाद ही उसे इसका पता चला. 

X पर "Siriusim" नामक समूह द्वारा किए गए दावों का हवाला देते हुए फाउंडेशन ने बताया कि डार्क वेब पर 3.75 लाख पंक्तियों के डेटा के साथ-साथ 2,722 पीडीएफ दस्तावेज भी जारी किए गए हैं, जिनमें लोन आवेदन और खाता खोलने के फॉर्म शामिल हैं. फाउंडेशन के अनुसार, बैंक ने अपने खुलासे में इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों का कोई जिक्र नहीं किया है.

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि घटना की अलर्ट मिलने के पांच दिन बीत जाने के बाद भी बैंक ने प्रभावित 3,897 ग्राहकों को इसकी प्रत्यक्ष सूचना नहीं दी है. इन ग्राहकों को अब साइबर ठगों द्वारा बैंक अधिकारी बनकर कॉल किए जाने और धोखाधड़ी का शिकार बनाए जाने का बड़ा जोखिम है. 

फाउंडेशन ने खेद जताया कि वर्तमान में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून की धाराएं पूरी तरह लागू न होने के कारण बैंक ग्राहकों को तुरंत सूचित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं, क्योंकि मौजूदा नियम केवल नियामकों को रिपोर्ट करने की अनुमति देते हैं.

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने मांग की है कि एसबीआई सभी प्रभावित ग्राहकों को एसएमएस, ईमेल और पत्र के माध्यम से तुरंत सूचित करे तथा उनकी सहायता के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन और ऑनलाइन जांच पोर्टल शुरू करे. 

साथ ही, फाउंडेशन ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से आग्रह किया है कि वह सभी विनियमित संस्थाओं को डेटा ब्रीच की स्थिति में तय समय के भीतर ग्राहकों को सूचित करने का निर्देश दे और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से DPDP कानून के तहत ग्राहक अधिसूचना से जुड़े प्रावधानों को तुरंत प्रभाव से लागू करने की अपील की है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP