SC की ED को सख्त चेतावनी- 'अपनी सीमाओं में रहें, दूसरी एजेंसियों के काम में दखल न दें'
केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन और उनके परिवार से जुड़े CMRL-Exalogic मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ED को सीमा न लांघने की सख्त हिदायत देते हुए राज्य पुलिस की FIR पर फिलहाल रोक लगा दी है.
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सख्त लहजे में हिदायत दी है कि वह अपनी कानूनी और वैधानिक सीमाओं का उल्लंघन न करे तथा अन्य जांच एजेंसियों के कामकाज में हस्तक्षेप करने से बचे. शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन, उनकी बेटी बीना थाइकंडियिल और दामाद मोहम्मद रियास द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की.
न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सुनवाई कर रही थी, जिसमें ED द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर CMRL-Exalogic मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केरल पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के तहत जारी जांच पर एक हफ्ते के लिए रोक लगा दी है और मामला अंतिम फैसले के लिए वापस केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ को भेज दिया है.
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने ED के रुख पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एजेंसी को अपने अभियोजन (Prosecution) को आगे बढ़ाने का पूरा अधिकार है, लेकिन उसे अपनी वैधानिक सीमाओं से बाहर हाथ नहीं फैलाना चाहिए. अदालत ने स्पष्ट किया कि ED के पास हवाला कारोबारियों या पूर्व मुख्यमंत्रियों की जांच करने की पूरी शक्ति है और उसने राज्य को सूचना देकर अपना वैधानिक कर्तव्य निभाया.
हालांकि, इसके बाद राज्य पुलिस को क्या करना चाहिए, यह तय करना ED का अधिकार क्षेत्र नहीं है.
पीठ ने केरल उच्च न्यायालय द्वारा जल्दबाजी में आदेश पारित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने ED की शिकायत पर प्रारंभिक जांच के लिए एक एसआईटी (SIT) का गठन किया था, लेकिन बिना उसका इंतजार किए तुरंत याचिका दायर कर दी गई.
इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने उन मुख्य आरोपियों का पक्ष सुने बिना ही एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया था. अदालत ने अब इस मामले को उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच के पास यह तय करने के लिए भेज दिया है कि दर्ज की गई FIR कानूनी रूप से वैध है या नहीं.