छत्तीसगढ़ के कई इलाके में कड़ाके की ठंड
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में एक बार फिर ठंड ने जोर पकड़ लिया है. प्रदेश के अधिकांश मैदानी इलाकों-रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और राजनांदगांव में रात का तापमान अचानक 3 से 4 डिग्री तक गिर गया, जिससे मौसम में कड़ाके की सर्दी महसूस होने लगी है.
सरगुजा संभाग में हालात और भी कठोर हैं, जहां शीतलहर का प्रभाव लगातार बना हुआ है. अंबिकापुर–बनारस मार्ग पर घना कोहरा इस कदर छाया है कि विजिबिलिटी सिर्फ 100 मीटर के आसपास रह गई है. हालात यह हैं कि वाहन चालकों को दिन के समय भी हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ रहा है. कई इलाकों में सुबह 8 बजे तक कोहरा बना रहने से स्कूल जाने वाले बच्चों और ऑफिस आने-जाने वालों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है.
मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्नदाब क्षेत्र का असर अब छत्तीसगढ़ के दक्षिण और मध्य भागों पर दिखने लगा है. इसी प्रणाली के चलते बस्तर, धमतरी, महासमुंद तथा रायपुर-बिलासपुर संभाग के कुछ इलाकों में आज कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है.
बादल छाने के कारण कुछ जगहों पर रात का तापमान सामान्य से नीचे दर्ज हुआ, जबकि कई क्षेत्रों में दिन का तापमान थोड़ा बढ़ा भी है. यह मिश्रित मौसम पैटर्न अगले 24 घंटों तक जारी रह सकता है.
बीते 24 घंटों में तापमान में अचानक आई गिरावट ने ठंड का असर और तेज कर दिया है. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले एक दिन में तापमान में खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन उसके बाद अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री तक बढ़ सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और मध्य भारत में बनने वाली हवाओं के नए पैटर्न का असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेगा, जिसके चलते रात और दिन के तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा.
मौसम में इस अचानक बदलाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी की है. विभाग ने कहा है कि ठंड और ठंडी हवाओं के कारण हाइपोथर्मिया, वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और श्वसन संबंधी संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है.
खासकर बुजुर्गों, बच्चों और हृदय एवं अस्थमा रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. लोगों को शीतलहर के दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, यात्रा करने पर गर्म कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने और रात के समय खुले में आग जलाने जैसी पारंपरिक सावधानियों का पालन करने की सलाह दी गई है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं, इसलिए भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में फेस कवर या मास्क पहनना लाभदायक होगा.
पिछले 24 घंटों में दर्ज किए गए तापमान के आंकड़े भी इस ठंड की तीव्रता को स्पष्ट करते हैं. दुर्ग में अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि सरगुजा के अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 6.9 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया, जो पिछले दस वर्षों में नवंबर महीने का सबसे ठंडा रिकॉर्ड है. मौसम विभाग का कहना है कि यदि हवा की गति और कम हुई, तो कुछ इलाकों में पाला गिरने जैसी स्थिति भी बन सकती है.
प्रदेश भर में अचानक बढ़ी ठंड ने जनजीवन को प्रभावित किया है-सुबह-सुबह चाय की दुकानों में भीड़ बढ़ गई है, सड़क किनारे अलाव जलने लगे हैं और कई जिलों में प्रशासन ने बेघर और बेसहारा लोगों को नाइट शेल्टर का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं. मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दिनों में मौसम की यही सर्द प्रवृत्ति जारी रह सकती है.