SECL खदान विस्तार के विरोध में हिंसक झड़प, 40 पुलिसकर्मी घायल
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में एसईसीएल (SECL) की अमेरा कोयला खदान के विस्तार के विरोध में बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान ईंट-पत्थर फेंके जाने से कम से कम 40 पुलिसकर्मी घायल हो गए. सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए इस पूर्ण संघर्ष में बड़ी संख्या में आदिवासियों और महिलाओं सहित कई ग्रामीण भी घायल हुए हैं.
यह हिंसा लखनपुर में अमेरा कोयला विस्तार परियोजना स्थल के पास भड़की, जब खदान विस्तार का विरोध कर रहे ग्रामीणों की एक बड़ी भीड़ ने परियोजना से संबंधित प्रशासनिक कार्यवाही के लिए तैनात पुलिस दल का सामना किया.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परसोड़ी कला और आस-पास के क्षेत्रों के ग्रामीण महीनों से इस खदान विस्तार का विरोध कर रहे हैं, उनका दावा है कि यह जमीन उनकी खेती की भूमि है.
सरगुजा के अतिरिक्त कलेक्टर सुनील नायक ने, जो मौके पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, बताया कि अमेरा खदान के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया 2016 में पूरी हो चुकी है. उन्होंने कहा कि कई ग्रामीणों को पहले ही मुआवजा मिल चुका है, जबकि कई अन्य अब मुआवजा लेने से इनकार कर रहे हैं और कोयला उत्पादन में बाधा डाल रहे हैं.
नायक ने पुष्टि की कि पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और उनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हैं. उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल ले जाया गया. कुछ ग्रामीणों को भी चोटें आईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया.
घायल महिला लीला मती ने, जिसके सिर पर पट्टी बंधी थी, संवाददाताओं से छत्तीसगढ़ी बोली में कहा, "हमारा गाँव हमें बहुत प्रिय है और हम इसे कंपनियों को नहीं देना चाहते. हम कहाँ जाएंगे? मेरे परिवार ने यहाँ रहकर काम किया और कमाया, मैं भी अपनी ज़मीन पर काम कर रही हूँ, क्या मुझे इसे बस यूँ ही दे देना चाहिए? मेरे बच्चों और पोते-पोतियों का क्या होगा? मेरी ज़मीन खोदने से यह बेकार हो जाएगी."
एसईसीएल की अमेरा खदान के विस्तार के लिए अधिग्रहित भूमि का कब्ज़ा लेने के लिए राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लगभग 500 कर्मियों का एक बड़ा पुलिस दल मौके पर पहुंचा था. जैसे ही टीम आगे बढ़ी, लाठियों, गुलेलों, पत्थरों और यहाँ तक कि कुल्हाड़ियों से लैस नाराज ग्रामीणों ने उनका सामना किया.
विरोध जल्द ही एक हिंसक झड़प में बदल गया. ग्रामीणों ने कथित तौर पर पुलिस दल पर पत्थर और गुलेल चलाना शुरू कर दिया. जवाब में, पुलिस ने भीड़ को पीछे धकेलने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लिया.
एएसपी अमोलक सिंह, ग्रामीण एसडीओपी और दुरपुर थाना प्रभारी अश्विनी सिंह उन घायलों में शामिल हैं. 25 से 40 पुलिसकर्मियों को अलग-अलग गंभीरता की चोटें आई हैं. गंभीर रूप से घायल इंस्पेक्टर अश्विनी सिंह को बेहतर इलाज के लिए अंबिकापुर भेजा गया है. झड़प में कई ग्रामीण भी घायल हुए, हालांकि उनकी सटीक संख्या और स्थिति स्पष्ट नहीं है.
भले ही अमेरा कोयला खदान विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण हो चुका है और प्रभावित किसानों में से 19% ने अब तक मुआवजा ले लिया है, फिर भी कई ग्रामीण जोर दे रहे हैं कि उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही वादा किया गया रोजगार, और इसलिए वे यह स्वीकार नहीं करते कि उनकी जमीन वैध रूप से अधिग्रहित की गई है.
देर शाम तक अमेरा कोयला खदान विस्तार क्षेत्र में तनाव बना रहा. अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बार-बार आंसू गैस के गोले दागे गए, और क्षेत्र के कुछ हिस्सों को प्रभावी ढंग से सील कर दिया गया.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट मौके पर डेरा डाले हुए हैं, समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और ग्राम प्रतिनिधियों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं. ग्रामीण अभी भी आक्रोशित हैं और जोर दे रहे हैं कि वे विवादित भूमि पर किसी भी मशीनरी या खनन गतिविधि की अनुमति नहीं देंगे.