छत्तीसगढ़: राजनीतिक आंदोलनों के 9 मामले वापस लेने की अनुशंसा, बैठक में फैसला
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में राजनीतिक आंदोलनों के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया में साय सरकार ने तेजी ला दी है. बुधवार को मंत्रालय में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित 'प्रकरण वापसी समिति' की बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आए 16 मामलों की गहन समीक्षा की गई.
इस बैठक में विचार-विमर्श के बाद समिति ने 9 मामलों को वापस लेने की सिफारिश गृह विभाग से की है. वहीं 2 प्रकरणों पर पुनरावलोकन के लिए उन्हें संबंधित जिलों के पास वापस भेज दिया गया है, जबकि जांच में राजनीतिक प्रकृति के न पाए जाने वाले मुकदमों को खारिज कर दिया गया.
प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शनों के प्रकरणों की समीक्षा और उनकी वापसी का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है. इससे पहले मार्च 2026 में भी साय सरकार ने 13 मामलों को वापस लेने की मंजूरी प्रदान की थी.
वहीं पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के दौरान गठित कैबिनेट उप-समिति ने भी किसानों, राजनीतिक दलों और आम जनता के आंदोलनों से जुड़े 100 से अधिक प्रकरणों को वापस लेने की अनुशंसा की थी. वर्तमान सरकार भी इसी क्रम में नियमानुसार केस-दर-केस समीक्षा कर मामलों को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
मंत्रालय में हुई इस उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान लंबित पड़े 8 पुराने मामलों पर भी चर्चा की गई. समिति ने पूर्व में अनुशंसित किए गए उन प्रकरणों की मौजूदा कानूनी स्थिति की जानकारी ली, जो अब तक पेंडिंग पड़े हुए हैं.
राज्य सरकार का उद्देश्य राजनीतिक और जनआंदोलनों के कारण आम लोगों व कार्यकर्ताओं पर दर्ज गैर-गंभीर मामलों को विधिक प्रक्रिया के तहत जल्द से जल्द समाप्त कर उन्हें राहत प्रदान करना है.