छत्तीसगढ़: प्रताड़ित पति ने मांगी इच्छा मृत्यु
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुंगेली में एक प्रताड़ित पति ने कलेक्टर से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है. गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लोरमी थाना क्षेत्र के निवासी प्रवीण सिंह ने अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कलेक्टर जनदर्शन में इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है. प्रवीण ने अपने आवेदन में बताया कि उसकी पत्नी, सास, ससुर और साले द्वारा लगातार की जा रही प्रताड़ना ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया है, जिसके चलते वह अब जीने की इच्छा खो चुका है.
प्रवीण ने कलेक्टर को सौंपे अपने आवेदन में कहा कि उसकी पत्नी आये दिन उसका अपमान करती है, उसे गालियां देती है और रिश्तेदारों के बीच उसकी छवि खराब करती है. ससुराल पक्ष भी उसे नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ता. इस मानसिक यातना से तंग आकर प्रवीण ने इतना बड़ा कदम उठाने की बात कही. इस मामले ने न केवल पारिवारिक विवादों को उजागर किया है, बल्कि पुरुषों के खिलाफ घरेलू उत्पीड़न और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर भी ध्यान आकर्षित किया है.
मुंगेली के कलेक्टर कुंदन कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिये हैं. उन्होंने बताया कि यह एक पारिवारिक विवाद का मामला प्रतीत होता है, जिसे समाधान के लिये फैमिली काउंसिलिंग सेंटर भेजा गया है. कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया जाएगा और यदि काउंसिलिंग से हल नहीं निकलता, तो आगे की कार्रवाई की जायेगी. इस मामले की जानकारी स्थानीय पुलिस अधीक्षक को भी दी गई है, ताकि आवश्यक कानूनी कदम उठाये जा सकें.
यह मामला समाज में पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक रिश्तों में संवाद की कमी जैसे गंभीर मुद्दों को रेखांकित करता है. जिला प्रशासन ने इस प्रकरण को संवेदनशीलता के साथ संभालने का वादा किया है, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और इस तरह के मामलों पर सकारात्मक चर्चा शुरू हो सके.
बता दें कि भारत में पुरुषों के लिये घरेलू हिंसा या वैवाहिक प्रताड़ना के खिलाफ कोई विशिष्ट कानून, जैसे कि महिलाओं के लिये घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, नहीं है. हालांकि, प्रताड़ित पति कुछ सामान्य कानूनी प्रावधानों के तहत राहत प्राप्त कर सकते हैं. निम्नलिखित कानूनी सुविधाएं उपलब्ध हैं:
भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत शिकायत:
धारा 498A (क्रूरता): यदि पत्नी या ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक या शारीरिक क्रूरता की जाती है, तो इस धारा के तहत शिकायत दर्ज की जा सकती है. हालांकि, यह धारा आमतौर पर महिलाओं द्वारा उपयोग की जाती है, लेकिन पुरुष भी इसका सहारा ले सकते हैं।
धारा 506 (आपराधिक धमकी): यदि पति को धमकी दी जाती है, तो इस धारा के तहत कार्रवाई हो सकती है.
धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना): शारीरिक हिंसा के मामले में यह धारा लागू हो सकती है.
धारा 499/500 (मानहानि): यदि पत्नी या ससुराल पक्ष द्वारा सार्वजनिक रूप से बदनामी की जाती है, तो मानहानि का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.
परिवार न्यायालय (Family Court):
पति परिवार न्यायालय में वैवाहिक विवादों, जैसे तलाक या काउंसलिंग के लिए आवेदन कर सकता है. यहाँ पारिवारिक समस्याओं का समाधान काउंसलिंग या मध्यस्थता के माध्यम से किया जा सकता है.
मानव अधिकार आयोग:
यदि पति को लगता है कि उसका मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न मानव अधिकारों का उल्लंघन है, तो वह राष्ट्रीय या राज्य मानव अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कर सकता है.
सिविल कोर्ट में मुकदमा:
पति मानसिक प्रताड़ना या बदनामी के लिए सिविल कोर्ट में हर्जाना (compensation) मांग सकता है. वैवाहिक रिश्ते में उत्पीड़न के कारण तलाक के लिये भी याचिका दायर की जा सकती है (हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 के तहत, यदि लागू हो).
पुलिस में शिकायत:
स्थानीय पुलिस स्टेशन में सामान्य शिकायत (FIR) दर्ज की जा सकती है, खासकर यदि शारीरिक हिंसा, धमकी, या अन्य आपराधिक कृत्य शामिल हों.
काउंसलिंग और मध्यस्थता:
कई मामलों में, जिला प्रशासन या परिवार काउंसलिंग सेंटर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर समाधान निकालने का प्रयास करते हैं.
पुरुषों के लिए घरेलू हिंसा के खिलाफ कोई विशिष्ट कानून नहीं होने के कारण, कानूनी प्रक्रिया जटिल हो सकती है. सामाजिक धारणाओं के कारण पुरुषों को अपनी शिकायत दर्ज करने में हिचकिचाहट हो सकती है. सबूत जुटाना (जैसे मानसिक प्रताड़ना का प्रमाण) मुश्किल हो सकता है.