मदकूद्वीप इको-पर्यटन परियोजना: HC ने DFO मुंगेली से मांगा नया शपथ पत्र
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मुंगेली जिले के मदकूद्वीप इको-पर्यटन प्रोजेक्ट को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मुंगेली के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) को एक नया शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.
इस शपथ पत्र में परियोजना के लिए अब तक आवंटित धनराशि और उसके वास्तविक उपयोग का विस्तृत विवरण देना होगा.
यह निर्देश 8 अप्रैल को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया. कोर्ट ने संज्ञान लिया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में स्वीकृत बजट का एक हिस्सा खर्च न होने के कारण लैप्स हो गया है.
डीएफओ द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, कुल 74.58 लाख रुपये के अनुमानित बजट में से वर्ष 2025-26 के लिए 20 लाख रुपये आवंटित किए गए थे. इसमें से केवल 16.34 लाख रुपये खर्च हुए, जबकि शेष 3.66 लाख रुपये 31 मार्च 2026 के बाद सरकारी खजाने में वापस चले गए.
वन विभाग ने कोर्ट को बताया कि परियोजना को पूरा करने के लिए शेष 54.58 लाख रुपये और पिछले साल के बकाया 3.66 लाख रुपये जारी करने हेतु मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर को अनुरोध भेजा गया है.
शिवनाथ नदी पर स्थित 24 हेक्टेयर का मदकूद्वीप द्वीप अपने पुरातात्विक अवशेषों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, जिसे अब एक प्रमुख सांस्कृतिक और इको-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है.