HC: पुलिसकर्मी की पुनर्बहाली के खिलाफ राज्य सरकार की अपील खारिज
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांस्टेबल नरेंद्र कुमार यादव की पुनर्बहाली के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है, इसे "पक्षपातपूर्ण" करार देते हुए. यादव को 2013 में महासमुंद में गणतंत्र दिवस के सुरक्षा ड्यूटी के दौरान एक इंसास राइफल और 20 गोलियों के गायब होने के बाद सेवा से समाप्त कर दिया गया था.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने 1 सितंबर को एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा. कोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया में खामी थी क्योंकि जांच अधिकारी ने ही अभियोजन अधिकारी की भूमिका निभाई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है. खंडपीठ ने यह भी नोट किया कि राज्य सरकार ने इस तथ्य पर विवाद नहीं किया कि अभियोजन अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया था और जांच अधिकारी ने स्वयं गवाहों से पूछताछ और जिरह की थी.
कोर्ट ने यह भी देखा कि समान आरोपों का सामना कर रहे दो अन्य कांस्टेबल, एलेक्सियस मिंज और दीपक विदानी, को पहले ही हाईकोर्ट के आदेश से पुनर्बहाल किया जा चुका है और राज्य सरकार ने उन आदेशों को चुनौती नहीं दी. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार नरेंद्र यादव के खिलाफ पक्षपातपूर्ण तरीके से कार्रवाई कर रही थी.
मामला 24 जनवरी 2013 को महासमुंद में गणतंत्र दिवस समारोह के सुरक्षा स्थल से एक इंसास राइफल और 20 गोलियां गायब होने से शुरू हुआ था. इस मामले में यादव और चार अन्य पुलिस कर्मियों, जिसमें हेड कांस्टेबल एलेक्सियस मिंज और कांस्टेबल दीपक विदानी, संजीत सिंह, और सूर्यकांत सिंह ठाकुर शामिल थे, के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी. उन पर "कर्तव्य में घोर लापरवाही" का आरोप लगाया गया था.
जांच के बाद यादव, मिंज और विदानी को सेवा से समाप्त कर दिया गया, जबकि दो अन्य कांस्टेबल को दो साल के लिए न्यूनतम वेतनमान पर पदावनत किया गया. यादव ने अपनी समाप्ति के आदेश को रिट याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी, जिसे 21 फरवरी 2025 को एकल न्यायाधीश की पीठ ने स्वीकार कर लिया था. एकल पीठ ने भी जांच अधिकारी द्वारा अभियोजन अधिकारी की भूमिका निभाने को कानूनी सिद्धांतों का उल्लंघन माना था.
यादव के वकील अभिषेक पांडेय और वर्षा शर्मा ने तर्क दिया कि सभी के खिलाफ विभागीय जांच सिविल सेवा वर्गीकरण और नियंत्रण नियम, 1966 के नियम 18 के तहत आवश्यक नोटिस का पालन किए बिना की गई थी.
हाईकोर्ट ने कहा, "एकल न्यायाधीश ने अपने आदेश में कोई अवैधता, अनियमितता या क्षेत्राधिकार की त्रुटि नहीं की है." कोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए उस खंड को भी हटा दिया, जो राज्य को यादव के खिलाफ नई कार्यवाही शुरू करने की अनुमति देता था.