HC: विश्वविद्यालय सेवा के रजिस्ट्रार को सरकारी विभाग में अटैच करना अवैध
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि 'राज्य विश्वविद्यालय सेवा' के तहत कार्यरत किसी भी रजिस्ट्रार (कुलसचिव) को विश्वविद्यालय प्रणाली के बाहर किसी अन्य सरकारी विभाग में पदस्थापित या अटैच नहीं किया जा सकता है. न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की एकल पीठ ने रजिस्ट्रार बिनोद कुमार एक्का द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत उन्हें उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय में अटैच किया गया था.
अदालत ने अपने फैसले में जोर देकर कहा कि रजिस्ट्रार का पद 'छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973' के तहत एक वैधानिक पद है और यह 'राज्य विश्वविद्यालय सेवा नियम, 1983' द्वारा शासित होता है.
इन नियमों के अनुसार, ऐसे अधिकारियों का स्थानांतरण केवल एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में ही किया जा सकता है. अदालत ने पाया कि न तो 1973 के अधिनियम में और न ही 1983 के नियमों में राज्य सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी रजिस्ट्रार को गैर-विश्वविद्यालय प्रतिष्ठान में तैनात करे.
याचिकाकर्ता बिनोद कुमार एक्का की ओर से अधिवक्ता नीरज चौबे ने दलील दी थी कि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा में पदस्थापना के दौरान उन्हें नियमों के विरुद्ध उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय में अटैच किया गया था.
हालांकि, राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लंबित रहने के कारण यह कदम उठाया गया था, लेकिन याचिकाकर्ता ने सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से मिले दस्तावेजों से सिद्ध कर दिया कि उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच शुरू नहीं की गई थी.
हाईकोर्ट ने अंततः इस अटैचमेंट आदेश को "नियमों के विपरीत" (De hors the rules) करार देते हुए खारिज कर दिया.