हाईकोर्ट: नाबालिग से गैंगरेप की 20 साल की सजा बरकरार
हाईकोर्ट: नाबालिग गैंगरेप की 20 साल की सजा बरकरार
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाबालिग से गैंगरेप के मामले में दो युवकों की 20 साल की कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा. बिलासपुर के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने 19 फरवरी, 2021 को दोनों को आईपीसी की धारा 376D के तहत 20 साल, धारा 323/34 के तहत एक साल और धारा 506 के तहत दो साल की सजा सुनाई थी. सभी सजाएं एक साथ चलेंगी.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने कहा, "यौन अपराध की पीड़िता के बयान का मूल्यांकन करते समय अदालत संवेदनशीलता बरतती है. पीड़िता से पूर्ण सटीक विवरण की उम्मीद नहीं की जाती, बल्कि उसे अपनी याददाश्त के आधार पर घटना को यथासंभव बताने की छूट दी जाती है."
घटना 18 नवंबर, 2017 की रात करीब 8 बजे बिलासपुर जिले के एक गांव में हुई. नाबालिग पीड़िता, जो कक्षा 8 में पढ़ती थी, अपने भाई-बहनों के साथ घर पर थी.
माता-पिता काम के लिये उत्तर प्रदेश गए थे. पीड़िता ने बताया कि शौचालय जाने पर 19 और 20 साल के आरोपियों ने उसका मुंह बंद कर, हाथ-पैर बांधकर बारी-बारी से दुष्कर्म किया और चाकू से धमकाया.
शोर सुनकर पीड़िता की बहन और भाई ने हंगामा किया, जिससे आरोपी भाग गये. पीड़िता ने तुरंत अपने भाई-बहनों और पड़ोसी को घटना बताई. मल्हार पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज हुई, जिसे बाद में मस्तूरी पुलिस स्टेशन स्थानांतरित किया गया.
हाईकोर्ट ने पुष्टि की कि पीड़िता की उम्र (16 साल, 7 महीने, 15 दिन) पॉक्सो एक्ट के तहत "नाबालिग" की परिभाषा में आती है. पीड़िता के बयान को उसके भाई-बहनों और मेडिकल रिपोर्ट ने पुष्ट किया, जिसमें जबरन यौन संबंध और चोटें साबित हुईं.
अपील खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने मामला संदेह से परे साबित किया. कोर्ट ने जोर दिया कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता का बयान महत्वपूर्ण होता है और इसे संवेदनशीलता से हैंडल करना चाहिये. अन्य अपराधों (धारा 323/34 और 506) की सजा भी बरकरार रखी गई.