रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

छत्तीसगढ़ HC: 498A में बरी होने के बाद भी चलेगा घरेलू हिंसा का केस

C

CG Khabar

28 अग. 2026, 03:37 PM 2 मिनट में पढ़ें 3

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने घरेलू हिंसा के एक मामले में अहम व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत बरी होने मात्र से पति या उसके परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) का मामला खत्म नहीं होता. अदालत ने साफ किया कि दोनों कानून अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं और उनका उद्देश्य भी भिन्न है, इसलिए एक मामले में दोषमुक्त होना दूसरे कानून के तहत राहत मांगने से पत्नी को रोक नहीं सकता.


यह फैसला न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने जंजगीर-चांपा जिले की एक याचिका को खारिज करते हुए सुनाया. मामले के अनुसार, पत्नी ने चांपा के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत याचिका दायर कर पति और उसके परिजनों पर मानसिक प्रताड़ना, एक लाख रुपये और बाइक की मांग का आरोप लगाया था. इस मामले को चुनौती देते हुए पति और उसके परिवार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 

विज्ञापन


याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चूंकि वे धारा 498A के आपराधिक मामले में पहले ही बरी हो चुके हैं और दोनों के बीच तलाक भी हो चुका है, इसलिए समान आरोपों पर घरेलू हिंसा का नया केस चलाना वैधानिक नहीं है.


उच्च न्यायालय ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 36 के तहत इसके प्रावधान अन्य कानूनों के अतिरिक्त हैं, न कि उनके स्थान पर. 2005 का यह कानून महिलाओं को पारिवारिक हिंसा के खिलाफ अधिक प्रभावी सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाया गया है. 


अदालत ने माना कि निचली अदालत द्वारा शिकायत पर संज्ञान लेने में कोई गैर-कानूनी कदम नहीं उठाया गया है. हालांकि, हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका खारिज होने का असर निचली अदालत द्वारा मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर दिए जाने वाले अंतिम निर्णय पर नहीं पड़ेगा.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP