छत्तीसगढ़ HC: सेना के जवान को पत्नी और बच्चों को हर महीने देने होंगे 22 हजार
बिलासपुर । संवाददाता: सेना में पदस्थ एक जवान को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने पारिवारिक अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें जवान को अपनी पत्नी और दो बच्चों के भरण-पोषण के लिए हर महीने 22,000 रुपये देने का आदेश दिया गया था.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ ने पति की समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जवान के वेतन, कृषि आय और बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह रकम किसी भी तरह से अत्यधिक नहीं मानी जा सकती.
मामला एक थल सेना कर्मचारी से जुड़ा है, जिसकी शादी के बाद से ही पत्नी के साथ संबंध तनावपूर्ण रहे. पति ने पारिवारिक अदालत के अक्टूबर 2024 के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत पत्नी को 10,000 रुपये और दोनों छोटे बच्चों को क्रमश: 7,000 तथा 5,000 रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया गया था.
पति का तर्क था कि उसकी पत्नी बीएड शिक्षित है और प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के अलावा ब्यूटी पार्लर व सिलाई से कमाई करती है. इसके अलावा, उसने बच्चों की पितृत्व क्षमता (पैटर्निटी) पर सवाल उठाते हुए डीएनए टेस्ट कराने की मांग भी की थी, जिसे अदालत पहले ही खारिज कर चुकी थी.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि प्रस्तुत सैलरी स्लिप के अनुसार जवान का मासिक वेतन 76,701 रुपये है. साथ ही उसके पास 3-4 एकड़ पैतृक कृषि भूमि भी है, जिससे सालाना 50 से 60 हजार रुपये की आय होती है.
अदालत ने माना कि वर्तमान जीवन स्तर, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल खर्चों को देखते हुए पति के पास पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने पारिवारिक अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी.