छत्तीसगढ़ में बढ़ा वनों का दायरा और बाघों का कुनबा- केदार कश्यप
रायपुर । संवाददाता: रायपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने राज्य में वन संरक्षण और वन्यजीव संवर्धन के क्षेत्र में हुए कार्यों का ब्यौरा साझा किया. मंत्री कश्यप ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के वन और वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें से 348 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा केवल अत्यंत सघन वनों का है.
राज्य की जैव विविधता में सुधार का सबसे बड़ा प्रमाण बाघों की बढ़ती संख्या है, जो साल 2022 में 17 से बढ़कर अब 35 तक पहुँच गई है. वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में सरकार ने गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व का गठन किया है और राजकीय पशु वनभैंसा व राज्य पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं.
उन्होंने कहा कि इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में 14 से 17 वनभैंसे देखे गए हैं. राज्य पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण के लिए स्थानीय युवाओं को ‘मैना मित्र’ के रूप में जोड़ा गया है, जिसके परिणामस्वरूप अब लगभग 600 से 700 पहाड़ी मैना देखे जा रहे हैं.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संतुलन को साधने के लिए राज्य में 'एक पेड़ माँ के नाम 2.0' और 'किसान वृक्ष मित्र' जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके तहत करोड़ों पौधों का रोपण किया गया है. अधोसंरचना के क्षेत्र में बिलासपुर के कोपरा जलाशय को देश का 96वां रामसर स्थल घोषित किया जाना और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में एशिया के सबसे बड़े मरीन फॉसिल पार्क का विकास राज्य के लिए गौरव का विषय बना है.
इसके साथ ही सरकार ने 'मोदी की गारंटी' के तहत 435 देवगुड़ियों का निर्माण कर आदिवासी संस्कृति का संरक्षण किया है और वन विभाग में बड़ी संख्या में नियुक्तियां कर युवाओं को रोजगार से जोड़ा है. मानव-हाथी द्वंद को कम करने के लिए 'गज संकेत' ऐप और हाथी मित्र दलों की तैनाती जैसे तकनीकी व सामाजिक प्रयास भी किए गए हैं. राज्य में 90 हाथी मित्र दल गठित किए गए हैं. वर्तमान में प्रदेश में कुल 355 हाथी दर्ज किए गए हैं.