छत्तीसगढ़ के डीएमएफ घोटाले में 6000 पन्नों की चार्जशीट
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा EOW ने बहुचर्चित जिला खनिज न्यास DMF घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात शासकीय अधिकारियों सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. यह मामला पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का है, जिसमें भारी वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है.
लगभग 6,000 पन्नों की यह चार्जशीट राजधानी रायपुर की विशेष अदालत में पेश की गई. इसमें IAS और PCSअधिकारियों समेत राजस्व व पंचायत विभाग के कई वरिष्ठ अफसरों को नामजद किया गया है. चार्जशीट के अनुसार, इन अधिकारियों ने 2021-22 और 2022-23 में कोरबा जिले में DMF फंड से जुड़ी योजनाओं में 40% तक कमीशन लेकर टेंडर आवंटन में भ्रष्टाचार किया, जिससे सरकार को लगभग ₹75 करोड़ का नुकसान हुआ.
चार्जशीट में जिन अफसरों को आरोपी बनाया गया है, उनमें प्रमुख हैं रानु साहू (निलंबित IAS अधिकारी) उस समय कोरबा की कलेक्टर, सौम्या चौरसिया- मुख्यमंत्री कार्यालय में तत्कालीन उप सचिव, माया वारियर-आदिवासी विकास विभाग में तत्कालीन सहायक आयुक्त, भरोसा राम ठाकुर -तत्कालीन उप कलेक्टर व DMF नोडल अधिकारी कोरबा, मुनेश्वर सिंह राज, वीरेंद्र राठौर, राधेश्याम मिर्झा-जनपद पंचायतों के तत्कालीन CEO के अलावा सूर्यकांत तिवारी (व्यवसायी) और मनोज द्विवेदी (बिचौलिया) भी आरोपी बनाए गए हैं.
ईओडब्ल्यू के अनुसार, सभी आरोपी वर्तमान में रायपुर केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में हैं.
कैसे रची गई थी साजिश?
जांच एजेंसी का कहना है कि एक संगठित साजिश के तहत मनचाहे ठेकेदारों को टेंडर दिलवाए गए. इसके बदले अफसरों ने 40% तक कमीशन लिया, जो ₹75 करोड़ तक पहुंच गया. यह पैसा टेंडर मूल्य का एक बड़ा हिस्सा था. आरोपियों ने सरकारी खजाने को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया और निजी लाभ कमाया.
इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय है और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है. ED ने रणु साहू, सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी को कोयला लेवी घोटाले में पहले ही गिरफ्तार किया था, वहीं माया वारियर को पिछले साल DMF घोटाले में पकड़ा गया.
ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, साहू के रायगढ़ और कोरबा कलेक्टर कार्यकाल के दौरान DMF में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ. ठेकेदारों से बड़ी रकम में रिश्वत लेकर उन्हें टेंडर दिए गए. यह रिश्वत अनुबंध मूल्य का 25-40% तक बताई जा रही है.
क्या है DMF?
जिला खनिज न्यास (District Mineral Foundation) एक ट्रस्ट होता है, जो खनन प्रभावित जिलों में खनन कंपनियों द्वारा दी गई धनराशि से संचालित होता है. इसका उद्देश्य खनन से प्रभावित लोगों के जीवनस्तर को सुधारना होता है.
राज्य की EOW ने यह मामला जनवरी 2024 में दर्ज किया था, जब ED ने इस घोटाले से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट में बताया गया कि कोरबा जिले में DMF फंड के टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ और जानबूझकर गलत फर्मों को ठेके दिए गए.