मनरेगा बजट में लगातार कटौती, मजदूर संकट में
छत्तीसगढ़ मनरेगा बजट में लगातार कटौती, मजदूर संकट में
धमतरी | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मनरेगा मजदूर पर्याप्त काम नहीं मिलने से नाखुश हैं. बजट में कटौती के चलते मजदूरों को भरपूर काम नहीं मिल रहा है.
इसके बावजूद विभाग का दावा है कि इस साल लक्ष्य से ज्यादा काम हो चुका है. जबकि इस साल अभी तक मनरेगा के अंतर्गत कोई बड़ा काम नहीं हुआ है.
सिर्फ छोटे कामों पर ही फोकस किया गया है. प्रधानमंत्री आवास में ही अब तक 6 लाख मानव दिवस का काम किया गया है.
धमतरी जिले में मनरेगा की स्थिति पिछले कुछ सालों से लगातार खराब होती जा रही है. इसका कारण साल दर साल लगातार बजट में कटौती है.
जिसके चलते मनरेगा पर आश्रित मजदूर परिवारों की जीविका पर संकट मंडराने लगा है.
चार साल में लक्ष्य के करीब भी नहीं पहुंचा
इस योजना के तहत वर्ष में करीब 60 लाख मानव दिवस का लक्ष्य दिया जाता था. जिसे साल 2020-21 में बढ़ा कर 85 लाख मानव दिवस का लक्ष्य कर दिया गया था.
इस साल कोरोना संकट के चलते लोगों को काम देने के उद्देश्य से बजट को बढ़ाया गया था. इसके बाद पिछले चार सालों से लगातार बजट में कटौती की जा रही है.
यहां तक कि पुराने लक्ष्य के आस पास भी बजट नहीं दिया गया है. कोरोना काल के बाद साल 2021-22 के बजट में करीब 25 लाख मानव दिवस की कटौती कर दी गई.
उस साल मात्र 60 लाख 81 हजार का बजट पास किया गया. इसके बाद साल 2022-23 में 48 लाख 48 हजार का बजट दिया गया.
फिर साल 2023-24 में 40 लाख 16 हजार कर दिया गया. इस साल तो भारी भरकम कटौती करते हुए मात्र 32 लाख 36 हजार मानव दिवस का लक्ष्य दिया गया है.
जबकि अधिकारियों द्वारा बजट खत्म होते ही शासन को अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव भी भेजा गया था. फिर भी बजट को बढ़ाया नहीं गया.
लक्ष्य से अधिक काम का दावा
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस साल बजट से ज्यादा काम किया जा चुका है. अभी तक 36 लाख 58 हजार मानव दिवस तक काम कर लिया गया है.
फिर भी पिछले सालों की तुलना में मनरेगा में काम कम हुआ है. इस बार सबसे ज्यादा काम तो आवास में किया गया है.
बताया गया कि जिले में 17 हजार आवास का निर्माण किया गया है. जिसमें करीब 6 लाख मानव दिवस का काम किया गया है.
इसके अलावा आंगनबाड़ी निर्माण, सालिड-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट पर भी काम किया गया है.
बताया गया कि बजट की कमी का असर मनरेगा विभाग के कर्मचारियों पर पड़ा है. क्योंकि विभाग के कर्मचारियों को मनरेगा के बजट से ही वेतन का भुगतान किया जाता है.
बजट की राशि का करीब 5 प्रतिशत कर्मचारियों के वेतन फंड में जाता है. लेकिन पिछले पांच माह से इन कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है.