बुध, 04 नव. 2026

CGKhabar

कोरोना मुकदमों की वैश्विक जंग: चीन ने अमेरिका के मिसौरी राज्य पर ठोका 53.5 अरब डॉलर का मानहानि

कोरोना वायरस से जुड़ी कानूनी खींचतान के बीच चीन की एक अदालत ने अमेरिकी राज्य मिसौरी के खिलाफ दायर 53.5 अरब डॉलर के मानहानि मुकदमे की सुनवाई शुरू कर दी है

C

CG Khabar

04 नव. 2026, 12:04 AM 2 मिनट में पढ़ें 19

कोर्ट
कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: बीजिंग और वुहान के अधिकारियों तथा प्रमुख चीनी संस्थानों ने कोविड-19 महामारी से जुड़े आरोपों को लेकर अमेरिकी राज्य मिसौरी के खिलाफ दायर एक मानहानि याचिका पर चीनी अदालत में कानूनी कार्यवाही शुरू करवा दी है. वुहान इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट की ओर से जारी एक बयान में जानकारी दी गई कि शुक्रवार को इस मामले की पहली सुनवाई की गई और फिलहाल अदालती कार्यवाही आगे जारी है.

यह मामला 30 अप्रैल 2025 को हुबेई प्रांत की वुहान सरकार, चीनी वैज्ञानिक अकादमी और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) द्वारा संयुक्त रूप से दायर किया गया था. इस केस में मिसौरी राज्य और उसके दो पूर्व अटॉर्नी जनरल एरिक श्मिट और एंड्रयू बेली को आरोपी बनाया गया था. 

अदालत द्वारा 7 मई को केस स्वीकार किए जाने के बाद, पिछले साल दिसंबर में मिसौरी की वर्तमान अटॉर्नी जनरल कैथरीन हैनावे को भी सह-आरोपी के रूप में शामिल कर लिया गया.

अदालती बयान के अनुसार, चीनी पक्ष का आरोप है कि अमेरिकी प्रतिवादियों ने अमेरिका में दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक मुकदमेबाजी को बढ़ावा दिया, झूठी जानकारी फैलाई तथा भेदभावपूर्ण टिप्पणियां कीं. इससे उनकी प्रतिष्ठा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन हुआ है और भारी नुकसान हुआ है. 

इस एवज में चीनी याचिकाकर्ताओं ने 356.437 अरब युआन (लगभग 53.5 अरब अमेरिकी डॉलर) के मुआवजे की मांग की है. साथ ही द न्यूयॉर्क टाइम्स, सीएनएन, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, द वाशिंगटन पोस्ट, यूट्यूब, पीपुल्स डेली और सिन्हुआ जैसे वैश्विक और चीनी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी रखी गई है.

यह मुकदमा दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी कोविड-19 लिटिगेशन का हिस्सा है. वर्ष 2020 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल एरिक श्मिट ने चीन सरकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग, वुहान सरकार और WIV के खिलाफ अमेरिकी अदालत में मुकदमा दायर किया था, जिसमें चीन पर वायरस के फैलाव को छिपाने का आरोप लगाया गया था. 

उस दौरान WIV ने वायरस के मैन-मेड होने और लैब से लीक होने जैसी बातों को ऑनलाइन साजिश करार देते हुए खारिज किया था. हालांकि, पिछले साल मार्च में एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने शुरुआती चरण को छिपाने का जिम्मेदार ठहराते हुए मिसौरी के पक्ष में 24.5 अरब डॉलर का डिफॉल्ट फैसला सुनाया था, जिसके जवाब में अब यह चीनी कार्रवाई सामने आई है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP