सोम, 02 नव. 2026

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पति का गुस्सा और 'बेवकूफ' कहना क्रूरता नहीं: SC ने खारिज की दहेज हत्या की FIR

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि पत्नी को 'बेवकूफ' या 'बेकार' कहना और पति का गुस्सैल स्वभाव क्रूरता या आपराधिक धमकी की श्रेणी में नहीं आता. कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज हत्या का केस रद्द कर दिया.

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02 नव. 2026, 10:45 PM 2 मिनट में पढ़ें 31

सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली । डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने टोरंटो, कनाडा में पत्नी की आत्महत्या के बाद पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज हत्या के मामले को रद्द कर दिया है. जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पत्नी को "बेवकूफ" (stupid) या "बेकार" (useless) कहना किसी भी तरह से क्रूरता या आपराधिक धमकी का अपराध नहीं बनता है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि जीवनसाथी का गुस्सैल स्वभाव या छोटी-छोटी बातों पर डांटना आपराधिक धमकी या गंभीर चोट पहुँचाने का अपराध नहीं है और इसे आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता.

मामले के तथ्यों के अनुसार, दोनों का विवाह 3 जनवरी 2021 को हुआ था और फरवरी 2022 में वे टोरंटो चले गए थे. 11 जून 2023 को पत्नी ने 22वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी. घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में महिला ने लिखा था कि एक साल से अधिक समय से नौकरी न मिलने के कारण वह खुद को जीवन में असफल महसूस कर रही थी. 

इसके बाद, महिला के पिता ने औरंगाबाद के सातारा पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 304B (दहेज हत्या), 323, 498A (क्रूरता), 504 और दहेज निषेध अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

अदालत ने अवलोकन किया कि आईपीसी की धारा 304B को लागू करने के लिए अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होता है कि मृत्यु से ठीक पहले महिला के साथ दहेज की मांग को लेकर क्रूरता या उत्पीड़न किया गया था. इस मामले में दहेज की अवैध मांग और आत्महत्या के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित करने वाला पुख्ता सबूत नहीं मिला है. एफआईआर में लगाए गए आरोप अस्पष्ट और सामान्य हैं.

शीर्ष अदालत ने कहा कि वैवाहिक मामलों में अदालतों को बेहद सावधान रहना चाहिए और जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि कानून के दुरुपयोग और न्याय की विफलता को रोका जा सके. 

अदालत ने माना कि मृतका के परिवार का दर्द दुखद है, लेकिन बिना किसी स्पष्ट सबूत, कार्य या लोप के पति या ससुराल वालों को इसका शिकार नहीं बनाया जा सकता. केवल सामान्य आरोपों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP