छत्तीसगढ़ में त्योहारी सीजन के दौरान चावल के दाम में उछाल
छत्तीसगढ़ में त्योहारी सीजन और पुराने धान के घटते स्टॉक के चलते चावल के दाम में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जानिए भिलाई, दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के बाजारों का हाल और कीमतों में तेजी के मुख्य कारण.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के भिलाई, दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर सहित प्रमुख बाजारों में त्योहारी सीजन के दौरान चावल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. इससे आम परिवारों के घरेलू बजट पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है. बाजार के रुझानों से पता चलता है कि गुणवत्ता, ब्रांड और उपलब्धता के आधार पर कई लोकप्रिय किस्में 10 रुपये से लेकर 40 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो चुकी हैं.
कीमतों की तुलना से स्पष्ट होता है कि एक महीना पहले एचएमटी चावल 50-60 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, जो दो हफ्ते पहले 65-70 रुपये तक पहुंचा और वर्तमान में करीब 75 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा है. इसी तरह काली मूंछ चावल, जो एक महीने पहले 58-68 रुपये था, दो हफ्ते पहले बढ़कर 70-78 रुपये हुआ और अब लगभग 85 रुपये प्रति किलो उपलब्ध है.
श्रीराम चावल का भाव 65-75 रुपये से बढ़कर 75-88 रुपये हुआ और अब कुछ बाजारों में यह 100 रुपये प्रति किलो के आसपास बोला जा रहा है. अब्बा हुजूर किस्म, जो पहले 70-76 रुपये प्रति किलो थी, दो हफ्ते पहले 90-95 रुपये पर पहुंची और वर्तमान में करीब 110 रुपये में बिक रही है.
जीरा राइस की कीमत में भी बड़ा उछाल आया है. यह एक महीना पहले 80-90 रुपये से बढ़कर दो हफ्ते पहले 100-110 रुपये हुआ और वर्तमान में 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. जावा फूल चावल, जिसकी कीमत 115-120 रुपये थी, दो हफ्ते पहले बढ़कर 125-140 रुपये हो गई.
बिलासपुर में सामान्य उसना और टुकड़ा चावल 35 रुपये से बढ़कर 50 रुपये प्रति किलो हो गया है, जबकि प्रीमियम किस्मों के दाम 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं.
राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण मिलों में पुराने धान के घटते स्टॉक, त्योहारी मांग और बारीक तथा सुगंधित किस्मों की सीमित उपलब्धता है. उनका अनुमान है कि नवंबर के अंत में नए धान की आवक और मिलिंग में सुधार होने के बाद कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है.
एक अन्य कारण यह भी है कि किसान 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलने वाली बेहतर उपज और सुनिश्चित खरीदी के कारण मोटे धान की खेती को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बारीक और सुगंधित धान का रकबा कम हो रहा है. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों में भी बारीक धान महंगा हो रहा है, जिससे खरीदी और परिवहन लागत में बढ़ोतरी हुई है.
व्यापारियों ने बेमौसम बारिश और बाढ़ को भी आपूर्ति बाधित होने का एक संभावित कारण बताया है, हालांकि फसल के नुकसान की पुष्टि करने वाले आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.
राइस मिल संचालकों का कहना है कि पुराने स्टॉक की कमी और त्योहारी मांग के कारण उत्पादन और बाजार आपूर्ति प्रभावित हो रही है. चावल के दामों में हुई इस तेजी का असर होटलों और रेस्टोरेंटों पर भी पड़ रहा है, जहां चावल दैनिक खर्च का एक बड़ा हिस्सा है और इससे उनके परिचालन लागत पर दबाव बढ़ रहा है.