बॉम्बे HC: अभिनेता इमरान खान को देनी होगी बिना शर्त माफी, 'लीव इंडिया' नोटिस पर फिलहाल रोक जारी
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शन में शामिल होने पर अभिनेता इमरान खान को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिना शर्त माफी मांगने और भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों में हिस्सा न लेने का हलफनामा देने का निर्देश दिया है.
मुंबई । डेस्क: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में अभिनेता इमरान खान को बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही अदालत ने अभिनेता को एक अंडरटेकिंग (हलफनामा) दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि वे भविष्य में ऐसे किसी भी विरोध-प्रदर्शन में भाग नहीं लेंगे. हाईकोर्ट ने विदेश क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) द्वारा जारी 'लीव इंडिया' नोटिस के निलंबन की अवधि को तब तक के लिए बढ़ा दिया है, जब तक कि इमरान खान को नोटिस का जवाब देने का अवसर नहीं मिल जाता.
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायाधीश अद्वैत सेठना की पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि इमरान खान एक ओसीआई (OCI) कार्ड धारक हैं और देश में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) अभ्यास से वे प्रभावित नहीं हैं. इसलिए उनका ऐसे प्रदर्शनों में शामिल होने का कोई कारण नहीं था.
अदालत ने स्पष्ट किया कि ओसीआई कार्ड धारक भारतीय नागरिकों के समान अधिकारों का दावा नहीं कर सकते और उन्हें देश में रहकर विरोध-प्रदर्शन करने या आलोचना करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
अभिनेता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धौंड ने अदालत को बताया कि इमरान खान को जांच या बयान दर्ज कराने के लिए नहीं बुलाया गया है और उनका प्रदर्शनकारियों या आयोजकों से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि अमेरिका में जन्म के बाद केवल दो वर्षों को छोड़कर, इमरान खान ने अपना पूरा जीवन भारत में ही बिताया है.
वकील ने कोर्ट को यह भी सूचित किया कि अभिनेता की उम्र 42 वर्ष है और वे प्रदर्शनों में शामिल न होने का हलफनामा देने को तैयार हैं.
दूसरी ओर, केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ओसीआई कार्ड धारकों के पास सीमित अधिकार होते हैं और उन्हें भारत में रहने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को उकसाया था.
हालांकि, अदालत ने माना कि केंद्र सरकार के पास संप्रभु शक्तियां हैं, लेकिन प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत याचिकाकर्ता को एफआरआरओ नोटिस का जवाब देने का एक मौका दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अभिनेता इतने वर्षों से देश में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए.
अदालत ने आदेश जारी करते हुए कहा कि जब तक एफआरआरओ इमरान खान का जवाब सुनकर मामले में निर्णय नहीं ले लेता, तब तक 'लीव इंडिया' नोटिस के निलंबन का आदेश प्रभावी रहेगा. इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को तय की गई है.