राहुल गांधी ने PM मोदी को कहा- आप विदेशी मदद से बने और टिके हैं प्रधानमंत्री
विदेशी मदद और देश को अस्थिर करने के आरोपों के बीच राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दी खुली बहस की चुनौती. जानिए दोनों नेताओं के बीच शुरू हुए इस नए जुबानी जंग के सभी पहलू
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "विदेशी मदद" के मुद्दे पर एक खुली बहस की चुनौती दी है. राहुल गांधी का यह कदम प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विपक्ष पर देश को अस्थिर करने के लिए विदेशी समर्थन लेने का आरोप लगाने के बाद सामने आया है.
राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि खुद प्रधानमंत्री मोदी का सत्ता में आना और पद पर बने रहना विदेशी समर्थन की बदौलत ही संभव हुआ है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए अपने तीखे हमले में राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री देश से झूठ बोलना बंद करें. उन्होंने दावा किया कि देश की वित्तीय प्रणाली को विदेशियों द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित और समर्थित किया जा रहा है, साथ ही विदेशी सोशल मीडिया भी प्रधानमंत्री का पूरा साथ दे रहा है.
राहुल गांधी ने किसी भी मंच और किसी भी समय खुली बहस का न्योता देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री में अगर हिम्मत है तो वे सामने आएं, लेकिन वे डर की वजह से ऐसा नहीं करेंगे.
विपक्ष पर प्रधानमंत्री मोदी का तीखा हमला
इससे पहले अपने गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा था कि जब देश बाहरी चुनौतियों का समाधान खोज रहा था, तब देश के भीतर की कुछ ताकतें अफवाहें और झूठ फैलाकर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही थीं.
उन्होंने विपक्ष को 'विरोध पक्ष' के बजाय 'अवरोध पक्ष' करार देते हुए आरोप लगाया कि हताशा में ये लोग देश के विकास के रास्ते में बाधा बन रहे हैं और संवैधानिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ा रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की ओर परोक्ष इशारा करते हुए कहा कि विदेश में कौन किससे गुप्त रूप से मिल रहा है और भारत विरोधी ताकतें किसे समर्थन दे रही हैं, देशवासियों को इन सभी पैटर्न को पहचानना होगा.
पहले भी दी जा चुकी है अमेरिकी तर्ज पर बहस की चुनौती
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को आमने-सामने की बहस की चुनौती दी है. इससे पहले 2 जनवरी 2019 को भी तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की तर्ज पर 20 मिनट की एक-ऑन-एक बहस की मांग की थी.
हालांकि, सरकार और विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट ने उस वक्त राफेल सौदे में लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया था.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कर चुके हैं सार्वजनिक बहस की वकालत
देश में मुख्यमंत्रियों या प्रधानमंत्रियों के दावेदारों के बीच सार्वजनिक बहस का विचार भारतीय जनता पार्टी के भीतर से भी उठ चुका है. 2 मई 2014 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि अलग-अलग पार्टियों की रैलियों के बजाय चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री पद के मुख्य दावेदारों के बीच बहस का आयोजन कराना चाहिए.
आडवाणी ने तब जोर देकर कहा था कि यदि पहले आम चुनाव के बाद से ही देश में यह व्यवस्था अपनाई गई होती, तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत होता.