ब्रिटिश एडवेंचरर कार्ल बुशबी ने 28 साल में पूरी की 50 हजार किमी की पैदल विश्व यात्रा
50,000 किलोमीटर का सफर, 28 साल का लंबा वक्त और बिना किसी गाड़ी के पूरी दुनिया की पैदल यात्रा! ब्रिटिश एडवेंचरर कार्ल बुशबी ने जंगलों, बर्फीले समुद्रों और वीज़ा संकटों को पार करते हुए अपना ऐतिहासिक 'गोलियत एक्सपेडिशन' पूरा कर लिया है और आखिरकार अपने घर हल (Hull) लौट आए हैं.
नई दिल्ली । डेस्क: 28 साल लंबी पैदल यात्रा पूरी करने के बाद ब्रिटिश एडवेंचरर कार्ल बुशबी अपने बचपन के घर लौट आए हैं. उन्होंने जंगलों, जमे हुए समुद्रों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हुए लगभग 50,000 किलोमीटर (31,070 मील) की दूरी तय की. 57 वर्षीय कार्ल बुशबी का उत्तरी इंग्लैंड के हल (Hull) शहर में उनकी मां एंजेला ने स्वागत किया.
उनके घर के बाहर "वेलकम होम सन" का बैनर लगा था. शहर के केंद्र में सैकड़ों समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया. कार्ल ने चुटकी लेते हुए कहा, "इंतजार कराने के लिए माफी चाहता हूं. क्या यह खत्म हो गया?"
कार्ल बुशबी ने नवंबर 1998 में दक्षिणी चिली के पुंटा एरेनास से अपनी इस यात्रा की शुरुआत की थी, जिसे 'गोलियत एक्सपेडिशन' नाम दिया गया था. उस समय उनके पास एक टेंट, कुछ सौ डॉलर और एक सस्ता प्लास्टिक कैमरा था. उनका लक्ष्य बिना किसी मोटर चालित वाहन का उपयोग किए एक अटूट मार्ग से अपने गृहनगर पहुंचना था.
उनकी यात्रा अमेरिका महाद्वीप के उत्तर से शुरू होकर अलास्का से रूस के बीच बेरिंग स्ट्रैट की बर्फ, मंगोलिया और चीन से होकर गुजरी. बाद में उन्होंने कैस्पियन सागर तैरकर पार किया और यूरोप की ओर बढ़े.
इस दौरान उन्हें कोलंबिया और पनामा के बीच डारियन गैप के घने जंगलों, रूस में हिरासत, और वीजा व फंडिंग की समस्याओं का सामना करना पड़ा. 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट में मुख्य प्रायोजक छूट गए, जिससे 12 साल में पूरी होने वाली यात्रा 28 साल में तब्दील हो गई. पिछले महीने इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने के बाद उन्होंने घर के लिए अंतिम पैदल सफर शुरू किया था.
हल पहुंचने पर उन्होंने कहा कि उन्हें यहां तक पहुंचाने में दुनिया भर के लोगों और अजनबियों की दयालुता का बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने इसे पूरी पृथ्वी की टीम की सफलता बताया. उनकी इस यात्रा पर एक फीचर-लेंथ डॉक्यूमेंट्री बन रही है और वे आने वाले हफ्तों में इंग्लैंड में एक स्पीकिंग टूर शुरू करने की योजना बना रहे हैं.