पंचायती राज योजनाओं के लिए वोटर ID और बायोमेट्रिक अनिवार्य, नहीं चलेगा आधार: केंद्रीय मंत्री ललन सिंह
पंचायती राज मंत्रालय की कल्याणकारी योजनाओं में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आधार की जगह वोटर आईडी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा.
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय पंचायती राज मंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने मंगलवार 3 नवंबर 2026 को यह दोहराया कि पंचायती राज मंत्रालय की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और उनके भुगतानों के लिए वोटर पहचान पत्र (EPIC) और बायोमेट्रिक सत्यापन ही मुख्य आधार होगा.
गैंगटॉक स्थित सिक्किम कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड के एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी दी. इससे पहले उन्होंने दिल्ली में 'पीपुल्स प्लान कैंपेन (PPC) 2026-27' पर आयोजित कार्यशाला में भी यही बात कही थी.
ललन सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में भुगतानों का आधार आधार कार्ड है, लेकिन अब इसे प्राथमिक पहचान पत्र नहीं माना जाएगा. दिल्ली में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने आधार कार्ड की आसान उपलब्धता पर चिंता जताते हुए कहा था कि यह हर गली-नुक्कड़ पर बन जाता है और यदि कोई चाहे तो इसे पांच मिनट में बनवा सकता है, जिससे फर्जी लाभार्थी बनने की संभावना रहती है.
मंत्री के अनुसार, अब लाभार्थियों को सरकारी सुविधाएं और भुगतान प्राप्त करने के लिए अपनी ईपीआईसी (Voter ID) संख्या के साथ बायोमेट्रिक सत्यापन देना होगा. उन्होंने तर्क दिया कि इस बदलाव से केवल पात्र लाभार्थियों को ही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा और फर्जी प्रविष्टियों को बाहर किया जा सकेगा, जिससे पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रिया मजबूत होगी.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष मतदाता सूची से कथित गलत नाम हटाए जाने को लेकर 'वोट चोरी' का अभियान चला रहा है. गौरतलब है कि 16वें वित्त आयोग ने वर्ष 2026-31 की अवधि के लिए 2.55 लाख पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों के लिए कुल 4,35,236 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है.