दिल्ली मतदाता सूची: सिर्फ आधार देने वालों की फिर होगी जांच, BLOs से मांगे अतिरिक्त दस्तावेज
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 'नो मैपिंग' के तहत केवल आधार कार्ड देने वाले मतदाताओं के दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा रही है. BLOs को नागरिकों से अतिरिक्त दस्तावेज जुटाने के निर्देश मिलने से असमंजस की स्थिति बन गई है.
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत जारी किए गए "नो मैपिंग" के नोटिसों के जवाब में केवल आधार कार्ड प्रस्तुत करने वाले मतदाताओं को अब जांच के एक और दौर का सामना करना पड़ रहा है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात बूथ-स्तर के अधिकारियों (BLOs) को मतदाताओं से नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं.
BLOs की रिपोर्ट के बावजूद EROs का रुख कड़ा
अनेक BLOs ने द हिंदू को बताया कि उन्होंने क्षेत्र सत्यापन रिपोर्ट और अंडरटेकिंग जमा कर दी थी, जिसमें यह पुष्टि की गई थी कि मतदाता पात्र हैं और वर्षों से अपने दिए गए पतों पर निवास कर रहे हैं. इसके बावजूद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (EROs) उन्हें मतदाताओं के पास दोबारा जाने और यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगने का निर्देश दे रहे हैं कि वे "बांग्लादेशी" या "रोहिंग्या" न हों.
यह नई जांच ऐसे समय में हो रही है जब दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रारूप मतदाता सूची में नोटिस के लिए चिह्नित 33.1 लाख मामलों में से 94% से अधिक को अंतिम सूची में शामिल करने के लिए चिह्नित किया जा चुका है.
सिस्टम पर फ्लैग हो रहे केवल आधार वाले मामले
केवल आधार कार्ड जमा करने वाले मतदाताओं के मामले ERO और सहायक ERO (AERO) के सिस्टम पर फ्लैग किए जा रहे हैं. BLOs का कहना है कि इसके बाद भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कागजात एकत्र करने के निर्देश दिए जा रहे हैं.
हालांकि, EROs के पास यह विकल्प उपलब्ध है कि यदि वे BLO की फील्ड रिपोर्ट और संलग्न अंडरटेकिंग से संतुष्ट हैं, तो वे मतदाता को पात्र मानकर अंतिम सूची में शामिल करने के लिए सुरक्षित रख सकते हैं.
बार-बार बदलते निर्देशों से बीएलओ परेशान
उत्तर-पूर्वी जिले के एक BLO ने अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए बताया कि वे इन मतदाताओं को वर्षों से जानते हैं और इनमें से कई बहुत बुजुर्ग हैं, जिनके पास कोई अन्य दस्तावेज या बैंक खाता तक नहीं है. एक अन्य BLO के अनुसार दस्तावेज एकत्र करने के निर्देशों में बार-बार बदलाव से भ्रम फैला हुआ है.
पहले किसी भी उपलब्ध दस्तावेज और अंडरटेकिंग के आधार पर मामला क्लियर करने को कहा गया था, लेकिन अब सत्यापन पूरा होने के बाद भी आधार के बल पर नागरिकता सिद्ध करने पर सवाल उठाए जा रहे हैं. एक मामले में तो पासपोर्ट जमा करने वाले मतदाता से भी दोबारा सत्यापन के लिए दस्तावेज मांगे गए हैं.
अधिकारियों का इनकार और ECI के दिशा-निर्देश
दूसरी तरफ, अधिकारियों ने इस प्रकार के किसी भी निर्देश से इनकार किया है और स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में "अवैध प्रवासियों" की कोई पहचान या रिकॉर्ड तैयार नहीं किया जा रहा है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केवल आधार पर्याप्त नहीं है, लेकिन यदि BLO की फील्ड रिपोर्ट संतोषजनक है तो ERO मतदाता को पात्र चिह्नित कर सकता है.
ECI ने पात्रता सिद्ध करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और पासपोर्ट सहित 11 दस्तावेज निर्धारित किए हैं. ERO असंतुष्ट होने पर कारण दर्ज करते हुए स्पष्ट आदेश के जरिए ही किसी को अयोग्य ठहरा सकता है. शुरुआती रिपोर्ट में 350 मतदाता अयोग्य पाए गए थे, जिसके बाद CEO कार्यालय ने "मामूली आधार" पर नाम हटाने से मना किया था.
दस्तावेजों की बाध्यता और अंतिम समय सीमा
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मैपिंग या तार्किक विसंगतियां किसी मतदाता की पात्रता को प्रभावित नहीं करती हैं. मूल आवश्यकता केवल भारत का नागरिक होना, 18 वर्ष से अधिक आयु होना और क्षेत्र का सामान्य निवासी होना है. प्रारूप सूची के लगभग 97 लाख मतदाताओं में से 33.1 लाख को नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें 13.9 लाख "नो मैपिंग" के थे.
नोटिसों के निपटारे की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दिया गया है, जिसके बाद 22 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा.