जंतर मंतर प्रदर्शन स्थल नहीं बल्कि सार्वजनिक सड़क: दिल्ली पुलिस ने SC में दिया हलफनामा
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि किसी विशेष स्थान पर विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार नहीं है. जंतर मंतर एक सार्वजनिक सड़क है जिसे प्रदर्शन स्थल घोषित करना जनहित के खिलाफ था
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने मंगलवार 3 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया कि जंतर मंतर कोई निर्दिष्ट 'साइट' नहीं बल्कि एक 'सार्वजनिक सड़क' है. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी विशेष स्थान पर विरोध प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता और राज्य विरोध के स्थानों को अन्य जगहों पर स्थानांतरित कर सकता है.
दिल्ली पुलिस की यह प्रतिक्रिया स्वाति सिंह द्वारा दायर उस याचिका के जवाब में आई है, जिसमें जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हाल ही में हटाने (डी-नोटीफिकेशन) को चुनौती दी गई थी. इस याचिका में स्वाति सिंह का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता और अधिवक्ता आकांक्षा मेहरा कर रही हैं. यह स्थान राष्ट्रीय राजधानी में नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक और मुख्य चुनाव आयुक्त विरोधी प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र रहा था.
पुलिस प्रमुख ने अपने हलफनामे में कहा कि जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में चिन्हित करना शुरुआत से ही जनहित के विपरीत था. यह एक सार्वजनिक सड़क का टुकड़ा है जो जनता के उपयोग और आवाजाही के लिए है. इसे स्थायी प्रदर्शन स्थल नहीं बनाया जाना चाहिए था.
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि इस सड़क पर हर साल लगभग 1,300 विरोध प्रदर्शन होते हैं. इसके कारण आपातकालीन सेवाओं में भारी बाधा आती है और सुरक्षा व्यवस्था से समझौता होता है. 20 जुलाई को हुए नीट-यूजी प्रदर्शन के दौरान भीड़ क्षमता से काफी अधिक हो गई थी, जिससे भगदड़ की आशंका बनी रहती है.
हलफनामे के अनुसार, इस साल 1 अगस्त से 17 अगस्त के बीच जंतर मंतर क्षेत्र में 250 डिस्ट्रेस कॉल, चोरी की 109 प्राथमिकी, वाहन चोरी की 10 प्राथमिकी, 250 से अधिक संपत्ति के नुकसान के दावे और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने, दंगा व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की 23 प्राथमिकी दर्ज की गईं.
इसके अलावा, जंतर मंतर के आसपास का क्षेत्र बेहद संवेदनशील है. इस क्षेत्र में 78 विदेशी दूतावास/मिशन, 99 केंद्र सरकार के कार्यालय, 7,017 निजी आवास स्थित हैं और यहाँ रोजाना 1.46 लाख लोगों की आवाजाही होती है. संसद के नए परिसर की निकटता ने भी इस क्षेत्र में गतिविधियों के विनियमन के महत्व को और बढ़ा दिया है.
पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने तर्क दिया कि असहमति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को अन्य नागरिकों के अधिकारों के साथ संतुलित किया जाना चाहिए. विरोध प्रदर्शन से आसपास के निवासियों, कार्यालयों या आम नागरिकों को असुविधा नहीं होनी चाहिए. सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराने के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि इससे दूसरों की आजीविका, व्यापार या शहर में स्वतंत्र रूप से घूमने के अधिकार में बाधा उत्पन्न हो.