छत्तीसगढ़: आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा, 16 निजी अस्पतालों पर गिरी निलंबन की गाज
आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े और मरीजों से अवैध वसूली के खिलाफ छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन: 16 अस्पतालों पर लगा निलंबन.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना के क्रियान्वयन में गंभीर धांधली और वित्तीय अनियमितताएं उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. स्वास्थ्य सेवाएं आयुक्त और स्टेट नोडल एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव कुमार झा के निर्देशों के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है.
विभाग ने जांच के बाद योजना के नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रदेश के 16 निजी चिकित्सा संस्थानों को एक से तीन वर्ष की अवधि के लिए योजना से निष्कासित कर दिया है.
यह कार्रवाई स्टेट नोडल एजेंसी द्वारा चलाए गए एक व्यापक औचक निरीक्षण अभियान के बाद संभव हो सकी, जिसके तहत छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्थित 19 अस्पतालों में दबिश देकर अहम दस्तावेज जब्त किए गए थे.
विस्तृत और लंबी जांच प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत कुल 19 में से 16 अस्पतालों पर आरोपों की पुष्टि हुई, जबकि तीन अस्पतालों को राहत मिली. इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर राजधानी रायपुर में देखा गया, जहां के आठ निजी अस्पतालों पर गाज गिरी है.
जांच रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हुई कि निजी अस्पताल सरकारी राशि का अनुचित लाभ उठाने के उद्देश्य से कई अवैध तरीके अपना रहे थे. अस्पताल प्रबंधन दूरदराज के क्षेत्रों और पड़ोसी राज्यों (जैसे ओडिशा और मध्य प्रदेश) से बिचौलियों एवं एजेंटों के माध्यम से मरीजों को अपने यहां ला रहे थे.
योजना के तहत पूरी तरह मुफ्त इलाज का प्रावधान होने के बावजूद कम पैकेज का हवाला देकर मरीजों और उनके परिजनों से अतिरिक्त नकद राशि वसूली जा रही थी.
इसके अतिरिक्त, सामान्य बीमारियों से पीड़ित रोगियों को अति गंभीर बताकर गहन चिकित्सा इकाई (ICU) का पैकेज ब्लॉक किया जा रहा था तथा बिना आवश्यक जांचों के गंभीर बीमारियों का फर्जी पैकेज तैयार किया जा रहा था.
जांच टीम ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा जिलों के अस्पतालों से साक्ष्य एकत्र किए थे. इसके बाद सभी संबंधित संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था. जवाब संतोषजनक न पाए जाने पर विभाग ने विभागीय कार्रवाई की.
योजना के पात्र हितग्राहियों से अतिरिक्त धनराशि वसूलने का दोष सिद्ध होने पर 10 अस्पतालों को एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया गया है, वहीं कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, फर्जी पैकेज बनाने और गंभीर फर्जीवाड़े में लिप्त 6 अस्पतालों को तीन वर्ष की अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है.
निलंबित अस्पतालों की सूची एवं विवरण:
3 साल के लिए निलंबित अस्पताल:
1) स्वामी चंद्रशेखरानंद अस्पताल (शहर: जगदलपुर) – ट्रैक्टर से गिरकर घायल मरीज के इलाज में हेपेटाइटिस का पैकेज ब्लॉक करने के कारण.
2) श्रीनिवास अस्पताल, गुढ़ियारी (शहर: रायपुर) – एजेंटों के माध्यम से मरीज बुलाने और सामान्य शिकायतों पर हृदय व गुर्दा रोग का पैकेज ब्लॉक करने के कारण.
3) अनंत साई अस्पताल, तेलीबांधा (शहर: रायपुर) – ओडिशा से मरीज बुलाकर फर्जी पैकेज बनाने के कारण.
4) पल्स अस्पताल, भिलाई (शहर: दुर्ग) – फर्जी दस्तावेज तैयार करने और बाहर से दवा मंगाने के कारण.
5) नगर स्थित अस्पताल (शहर: रायपुर) – मध्य प्रदेश से मरीज मंगाकर बिना जांच निमोनिया का इलाज दिखाने के कारण.
(छठा अस्पताल: गंभीर गड़बड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के मामले में प्रतिबंधित)
1 साल के लिए निलंबित अस्पताल:
1) महावीर अस्पताल, शंकर नगर (शहर: रायपुर) – मरीज से 80,000 रुपये अतिरिक्त वसूलने और पंजीकृत स्थान से अलग स्थान पर संचालन करने के कारण.
2) एसके केयर अस्पताल, पचपेड़ी नाका (शहर: रायपुर) – अधिकतर मरीजों को निमोनिया बताकर भर्ती करने के आरोप में.
3) जय जगन्नाथ अस्पताल (शहर: कबीरधाम) – मरीजों से अतिरिक्त राशि लेने की शिकायत सही पाए जाने पर.
4) अशोक प्रसूति मंदिर (शहर: बिलासपुर) – गलत पैकेज से इलाज करने और दस्तावेज में कमियां पाए जाने के कारण.
5) नेताम अस्पताल (शहर: कबीरधाम) – योजना के नियमों के उल्लंघन पर.
6) हरिकृष्णा केयर अस्पताल (शहर: कोरबा) – योजना के नियमों के उल्लंघन पर.
7) केयर एंड केयर अस्पताल (शहर: बिलासपुर) – योजना के नियमों के उल्लंघन पर.
(इसके अलावा 3 अन्य अस्पताल: योजना के पात्र हितग्राहियों से अतिरिक्त राशि वसूलने के आरोप सिद्ध होने पर 1 साल के लिए प्रतिबंधित)