महिला आरक्षण उल्लंघन: रायपुर नगर निगम पर HC ने लगाया 3 लाख का जुर्माना
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर नगर निगम द्वारा की गई एक पुरानी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए महिला आरक्षण के नियमों का उल्लंघन करने को पूरी तरह से गैरकानूनी घोषित कर दिया है. जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक सर्कुलर या मनमाने तर्क के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षित पदों को पुरुषों को सौंपना सरासर अवैध है.
इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के चलते मानसिक और आर्थिक पीड़ा सहने वाली पीड़िता नम्रता देवांगन को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश रायपुर नगर निगम आयुक्त को दिया गया है.
यह पूरा विवाद साल 2013-14 में निकली सहायक शिक्षक (शिक्षाकर्मी वर्ग-3, विज्ञान) के 204 पदों की भर्ती से जुड़ा हुआ है. चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए सुरक्षित 12 पदों पर नियमों को दरकिनार कर पुरुषों की बहाली कर दी गई थी.
ओबीसी महिला वर्ग में 60.70 अंक प्राप्त करने के बावजूद नियुक्ति से वंचित रही धमतरी की नम्रता देवांगन ने इस गड़बड़ी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. बचाव में नगर निगम ने 1997 के एक सर्कुलर की आड़ लेते हुए दावा किया था कि योग्य महिला अभ्यर्थी न मिलने के कारण पद पुरुषों से भरे गए थे, जिसे अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया.
हालांकि, कानूनी मोर्चे पर इस बड़ी जीत के बावजूद 12 साल पहले नियुक्त किए जा चुके 12 पुरुष शिक्षकों की नौकरियां जाने से बच गई हैं. अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता नम्रता देवांगन को बाद में गणित शिक्षिका के पद पर नियुक्ति प्राप्त हो चुकी है.
इसी बात को ध्यान में रखते हुए पीठ ने मानवीय आधार पर कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं समाप्त न करने का फैसला लिया, लेकिन निगम की इस लापरवाही की कीमत भरपाई के रूप में चुकाने का कड़ा संदेश दिया.