महेश कुड़ियम के घर पहुंची आप की टीम, पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप
बीजापुर मुठभेड़ को आम आदमी पार्टी ने फर्जी बताया है
जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 5 और 6 जून को पुलिस और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ को आम आदमी पार्टी ने फर्जी बताया है. आप का कहना है कि मुठभेड़ में मारे गए सात कथित माओवादियों में से एक सरकारी कर्मचारी था.
इस मामले की जांच के लिए आम आदमी पार्टी ने एक टीम गठित की है. टीम आज कथित माओवादी महेश कुड़ियम के घर इरपागुट्टा पहुंची और उनके परिवार वालों से मुलाकात की. इसके बाद टीम ने जगदलपुर में प्रेसवार्ता की.
आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ कर एक सरकारी कर्मचारी का एनकाउंटर किया है. मृतक सरकारी स्कूल में रसोइया का काम करता था. पुलिस ने उसे एक लाख रुपये का इनामी माओवादी भी बता दिया है.
उन्होंने कहा कि महेश कुड़ियम के परिजनों ने उसके सरकारी कर्मचारी होने के सारे सबूत आम आदमी पार्टी की टीम को दिखाएं हैं. घटना के 25 दिन बीत जाने के बाद भी कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनके परिजनों से मिलने नहीं पहुंचा है.
आम आदमी पार्टी ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए महेश कुड़ियम की हत्या को लेकर न्यायिक जांच करने की मांग की है. साथ ही मृतक महेश कुड़ियम के परिजनों को एक करोड़ रुपए मुआवजा राशि देने की मांग की है.
आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि महेश कुड़ियम के 7 बच्चे हैं. सरकार को उनके पालन पोषण का खर्चा उठाना चाहिए और उन्हें तत्काल मुआवजा राशि भी दिया जाना चाहिए.
प्रियंका शुक्ला ने बताया कि उनकी अध्यक्षता में 10 लोगों का जांच दल बीजापुर जिले के इरपागुट्टा गांव पहुंचा और कथित माओवादी महेश कुड़ियम की पत्नी सुमित्रा कुड़ियम और उनके 7 बच्चों सहित गांव वालों से मुलाकात की. इस मामले में तथ्यों को इकट्ठा किया है.
प्रियंका शुक्ला का कहना है कि 6 जून को महेश अपने मवेशी को ढूंढने गांव से लगे जंगल गया था, जो वापस नहीं लौटा.
उन्होंने दावा किया है कि इस दौरान एक युवक ने देखा था कि पुलिस वाले किसी व्यक्ति को हाथ बांध कर रखे थे. परिजन पता लगाने 8 जून को बीजापुर थाने पहुंचे, तब तक महेश को मार दिया गया था. इसके बाद महेश का शव परिजनों और गांव वालों को सुपुर्द किया गया. गांव वालों का कहना है कि महेश कुड़ियम नक्सली नहीं था.