डिफाल्टरों पर 1.62 लाख करोड़ बकाया- वित्त मंत्रालय
नई दिल्ली । डेस्क: वित्त मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण खुलासे में बताया कि 31 मार्च 2025 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 1,629 कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं को विलफुल डिफॉल्टर के रूप में चिह्नित किया है. इन उधारकर्ताओं पर कुल 1,62,961 करोड़ रुपये का बकाया है.
यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में साझा की. यह आंकड़ा सेंट्रल रिपॉजिटरी ऑफ इन्फॉर्मेशन ऑन लार्ज क्रेडिट्स (CRILC) में बैंकों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों पर आधारित है और इसमें विदेशी उधारकर्ता शामिल नहीं हैं.
मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, "सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा सेंट्रल रिपॉजिटरी ऑफ इन्फॉर्मेशन ऑन लार्ज क्रेडिट्स (CRILC) में रिपोर्ट किये गये आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक 1,629 उधारकर्ता, जिनका कुल बकाया ऋण 1,62,961 करोड़ रुपये है, को विलफुल डिफॉल्टर के रूप में वर्गीकृत किया गया."
सरकार ने इन विलफुल डिफॉल्टर के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर जोर दिया है. ऐसे उधारकर्ताओं को अतिरिक्त ऋण सुविधाओं से वंचित किया जाता है और अगले पांच वर्षों तक नये उद्यम शुरू करने पर प्रतिबंध लगाया जाता है.
इसके अलावा, इनके साथ जुड़ी कंपनियों को पूंजी बाजारों से धन जुटाने की अनुमति नहीं है, जिससे भविष्य में चूक को रोकने और वित्तीय अनुशासन बनाये रखने का प्रयास किया जा रहा है.
भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार, बैंकों को 25 लाख रुपये और उससे अधिक के ऋण वाले विलफुल डिफॉल्टर की सूची हर महीने सभी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों (CIC) जैसे CIBIL और एक्सपेरियन को प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है. ये सूचियां इन कंपनियों की वेबसाइटों पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जिससे हितधारकों को जोखिमों की जानकारी मिल सके.
चौधरी ने यह भी बताया कि "बैंक योग्य मामलों में विलफुल डिफॉल्टर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही भी शुरू कर सकते हैं."
विदेश भाग चुके चूककर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के तहत नौ व्यक्तियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है, और मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 15,298 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है.
वित्त मंत्रालय ने बताया कि "PMLA के तहत बैंक धोखाधड़ी मामलों में 25,806.38 करोड़ रुपये (लगभग) की संपत्ति पीड़ित बैंकों या वैध दावेदारों को वापस की गई है, जिसमें जब्त की गई राशि और मुकदमे के दौरान वापस की गई राशि शामिल है."