रवि, 18 अक्टू. 2026

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देश में विरोध प्रदर्शन अब अपराध बन गया है- कपिल सिब्बल

एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिब्बल ने जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल की सूची से हटाए जाने (डीनोटिफाई) के फैसले पर सवाल उठाए और कहा कि भारत में अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना एक तरह से “अपराध” जैसा बना दिया गया है.

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18 अक्टू. 2026, 12:20 AM 2 मिनट में पढ़ें 19

कपिल सिब्बल
कपिल सिब्बल

नई दिल्ली । डेस्क: वरिष्ठ अधिवक्ता और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर देश में असहमति और विरोध के अधिकार को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है. एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिब्बल ने जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल की सूची से हटाए जाने (डीनोटिफाई) के फैसले पर सवाल उठाए और कहा कि भारत में अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना एक तरह से “अपराध” जैसा बना दिया गया है.

सिब्बल ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19(1) नागरिकों को विरोध करने का मौलिक अधिकार देता है, लेकिन मौजूदा सरकार के रुख से ऐसा लगता है कि यह अधिकार अब मौलिक नहीं रहा. 

उन्होंने सरकार के उस विकल्प को भी खारिज किया जिसमें प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान जाने की सलाह दी जा रही है. उन्होंने तर्क दिया कि दशहरा उत्सव के कारण वहां प्रदर्शन करना संभव नहीं है.

अन्य देशों की मिसाल देते हुए वरिष्ठ सांसद ने कहा कि न्यूयॉर्क में यूनियन स्क्वायर, लंदन में पार्लियामेंट स्क्वायर और पेरिस में बास्टिल जैसे प्रमुख स्थल शहरों के केंद्र में लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के लिए आरक्षित हैं. 

ऐसे में भारत में मुख्य स्थलों पर पाबंदी लगाना सरकार की दोहरी नीति को दर्शाता है, जहां विदेश में लोकतांत्रिक परंपराओं का बखान किया जाता है और देश के भीतर अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटा जाता है.

सिब्बल ने जंतर-मंतर पर पूर्व में हुई हिंसा के लिए बाहरी तत्वों, पुलिस की कार्रवाई और कथित तौर पर पत्थर से भरे ट्रक लाए जाने को जिम्मेदार ठहराया. इसके साथ ही उन्होंने मेट्रो व ट्रेन सेवाओं पर रोक लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की नीति की कड़ी निंदा की.

अर्थव्यवस्था और चुनाव प्रणाली पर बात करते हुए सिब्बल ने कहा कि बढ़ती बेरोजगारी, आर्थिक संकट और घटते सार्वजनिक निवेश के कारण जनता का सरकार से भरोसा उठ चुका है. 

उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के चुनावों में मतदाता सूचियों में हेरफेर किया गया और चुनावी प्रणालियों का केंद्रीयकरण किया गया. सिब्बल ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस मामले में हस्तक्षेप जरूर करेगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP