युद्ध और ड्रोन का साया: जोखिम में आसमान, पायलटों की बढ़ी मुश्किलें
नई दिल्ली । डेस्क: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए आसमान अब पहले से कहीं अधिक खतरनाक हो गया है. हाल के समय में युद्धग्रस्त क्षेत्रों से गुजरने वाले हवाई मार्गों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और सैन्य ड्रोनों की मौजूदगी ने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में खलबली मचा दी है.
रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन से लेकर अफगानिस्तान और अब मिडिल ईस्ट में जारी संघर्षों ने पायलटों पर मानसिक दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि उन्हें अब न केवल तकनीकी चुनौतियों बल्कि जीपीएस स्पूफिंग और मिसाइल हमलों जैसे युद्धकालीन खतरों से भी जूझना पड़ रहा है.
यूरोपीय कॉकपिट एसोसिएशन की अध्यक्ष तंजा हर्टर के मुताबिक, वाणिज्यिक पायलटों को युद्ध क्षेत्र के खतरों से निपटने का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता, जिससे उनमें भय और चिंता बढ़ रही है.
स्थिति इतनी गंभीर है कि हाल ही में एयर फ्रांस और लुफ्थांसा जैसी प्रमुख एयरलाइनों को मिसाइल हमलों के डर से अपने विमानों के मार्ग बदलने या उन्हें वापस उतारने पर मजबूर होना पड़ा है.
इसके अलावा, यूरोप और अमेरिका के व्यस्त हवाई अड्डों पर अज्ञात ड्रोनों की बढ़ती घुसपैठ एक नया सिरदर्द बन गई है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ये छोटे ड्रोन रडार की पकड़ में नहीं आते और यदि ये विमान के इंजन से टकरा जाएं, तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है.
फिलहाल, सुरक्षा के मद्देनजर पायलटों के पास हवाई अड्डे बंद करने या ऊंचाई बढ़ाकर उड़ने के अलावा कोई ठोस विकल्प नहीं बचा है, जो वैश्विक विमानन सुरक्षा के लिए एक बड़ी चेतावनी है.
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