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मुंबई में ‘विराट गर्जना मोर्चा’: SIR के विरोध में उद्धव और राज ठाकरे साथ आए

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04 अक्टू. 2026, 03:21 PM 4 मिनट में पढ़ें 4

उद्धव ठाकरे-राज ठाकरे
उद्धव ठाकरे-राज ठाकरे

मुंबई । डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है. शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने एक साथ आकर रविवार को मुंबई में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया. इस ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का मुख्य उद्देश्य राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना था.


दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ यह मार्च बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) मुख्यालय की ओर बढ़ा. इस प्रदर्शन में विपक्षी गठबंधन के प्रमुख घटक दलों के नेता भी शामिल हुए, जिनमें कांग्रेस नेता बालासाहब थोराट और विजय वडेट्टीवार के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख प्रमुख थे. प्रदर्शन के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के झंडे का इस्तेमाल नहीं किया गया और प्रतिभागियों से केवल राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराने की अपील की गई थी. इसके साथ ही 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस मोर्चे को अपना समर्थन दिया.

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उद्धव ठाकरे के तीखे हमले: "चुनाव आयोग बना सत्ताधारी दल का हथियार"


मोर्चे को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त भारतीय जनता पार्टी के "हथियार" की तरह काम कर रहे हैं. ठाकरे ने मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि यह प्रक्रिया अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को बाहर निकालने के लिए की गई थी, तो सरकार बताए कि इस दौरान कितने बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए.


उद्धव ठाकरे ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि अधिकारियों और सत्ताधारी दल के नेताओं को इतिहास से सबक लेना चाहिए, वरना उन्हें भी न्यूरेमबर्ग ट्रायल जैसी जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी, धर्म या जाति के खिलाफ नहीं बल्कि देश के लोकतंत्र और स्वतंत्रता को बचाने के लिए है. ठाकरे का दावा था कि महाराष्ट्र में एसआईआर के तहत लगभग 2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में 30 लाख और तमिलनाडु में 70 लाख मतदाता बाहर हुए हैं. उन्होंने समय पर सुनवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की भी आलोचना की.


राज ठाकरे की मांग: एसआईआर रद्द हो और बैलेट पेपर से हों चुनाव


एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने मांग रखी कि महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत पूरी तरह से रद्द किया जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पैरवी की. राज ठाकरे ने कहा कि वह 2017-18 से ही मतदाता सूची में अचानक कम होती संख्या का मुद्दा उठा रहे हैं और इस संदर्भ में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मिल चुके हैं.


राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि छह महीने के भीतर विधानसभा चुनाव के दौरान वोट शेयर में इतना बड़ा अंतर कैसे आ सकता है. उन्होंने कहा कि जनता को यह अधिकार होना चाहिए कि वह किसे चुनती है, न कि चुनाव आयोग यह तय करे.


कांग्रेस का आरोप और मतदाता सूची के आंकड़े


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहब थोराट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि अब चुनाव आयोग के आंकड़ों से ही यह बात साबित हो रही है. थोराट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव और चयन समिति से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाए जाने को इस प्रशासनिक खराबी का मुख्य कारण बताया.


रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी ड्राफ्ट रोल में 2.06 करोड़ से अधिक मतदाताओं (लगभग 21.14%) के नाम शामिल नहीं हो सके. पूर्व में राज्य में 9.78 करोड़ मतदाता थे, जो घटकर 7.71 करोड़ रह गए हैं. अधिकारियों के अनुसार, यह फॉर्म इसलिए जमा नहीं हो पाए क्योंकि मतदाता या तो मृत पाए गए, स्थानांतरित हो गए थे या उनका पता नहीं चल सका. पुणे और ठाणे में ऐसे सबसे ज्यादा मामले सामने आए.


बीजेपी का पलटवार: प्रदर्शन को बताया "सियार मार्च"


विपक्ष के इस महामोर्चे पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार ने इस विरोध प्रदर्शन को "लोमड़ियों का मार्च" (मार्च ऑफ फॉक्सेस) करार दिया. उन्होंने कहा कि जब भी विपक्ष चुनाव हारता है, तो वह अपनी नाकामी छिपाने के लिए चुनाव आयोग और ईवीएम को दोष देने लगता है. शेलार ने याद दिलाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में पदभार ग्रहण किया था, ऐसे में पिछले चुनाव परिणामों पर उनके नाम का मुद्दा उठाना तर्कहीन है. बीजेपी प्रवक्ताओं ने भी इसे राजनीतिक हताशा से प्रेरित करार दिया.File Photo.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP