शुक्र, 06 नव. 2026

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अमेरिका-इजराइल के बीच अब सैन्य मदद नहीं, रक्षा तकनीक की होगी नई डील

अमेरिका और इजराइल के दशकों पुराने सैन्य संबंधों में एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है. प्रत्यक्ष वार्षिक सैन्य सहायता को समाप्त कर दोनों देश अब रक्षा तकनीक और अनुसंधान में संयुक्त सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.

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06 नव. 2026, 11:24 AM 3 मिनट में पढ़ें 23

नेतन्याहू-ट्रंप
नेतन्याहू-ट्रंप

नई दिल्ली । डेस्क: संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंधों का ढांचा अगले दो वर्षों में पूरी तरह बदलने की ओर अग्रसर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान यह घोषणा कर सभी को चौंका दिया कि इजराइल को हर साल मिलने वाली लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रत्यक्ष सैन्य सहायता इस साल के अंत तक बंद कर दी जाएगी. ट्रंप ने दावा किया कि इजराइल को अब इस प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता की आवश्यकता नहीं है और इस संदर्भ में उनकी इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सहमति बन चुकी है.

प्रत्यक्ष सहायता से रक्षा सहयोग की ओर बदलाव का ढांचा

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जून 2025 में ईरान के साथ हुए 12 दिवसीय युद्ध के बाद से ही अमेरिका-इजराइल संबंधों को प्रत्यक्ष वित्तीय मदद के बजाय तकनीकी सहयोग की तरफ मोड़ने की चर्चा कर रहे हैं. हालांकि, यह वार्ता सितंबर 2028 में समाप्त हो रहे मौजूदा 10 वर्षीय सहमति पत्र (MOU) के स्थान पर नया समझौता तैयार करने के संदर्भ में हो रही थी. अमेरिकी कानून और संविधान के तहत राष्ट्रपति को संसद द्वारा मंजूर सहायता राशि को रातों-रात रोकने का एकतरफा अधिकार नहीं है, क्योंकि यह मदद विदेश मंत्रालय द्वारा विदेशी सहायता अधिनियम कानूनों के तहत प्रदान की जाती है. विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख हालिया मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के बाद पैदा हुए राजनीतिक दबाव का परिणाम है.

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एनडीएए के तहत रक्षा मंत्रालय की नई व्यवस्था

अमेरिकी संसद के समक्ष लंबित राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (NDAA) के तहत इजराइल को दी जाने वाली सीधी सुरक्षा सहायता को पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) के माध्यम से गहरे रक्षा सहयोग में बदलने का प्रस्ताव है. इस व्यवस्था से वित्तीय मदद की कुल राशि में बढ़ोतरी भी हो सकती है. 

इसे 'विदेशी सहायता' के स्थान पर 'रक्षा सहयोग' का नाम देने से यह विदेश मंत्रालय की सख्त मानवाधिकार जांच और शर्तों के दायरे से बाहर हो जाएगी. जहां कुछ विशेषज्ञ इसे अमेरिकी जनता में इजराइल के प्रति घटते समर्थन के बीच अरबों डॉलर की राशि को सुरक्षित रखने का जरिया मान रहे हैं, वहीं अन्य विश्लेषकों का कहना है कि यह अमेरिकी रक्षा खर्च में कटौती और सीमित सहायता के नए युग का संकेत भी हो सकता है.

दीर्घकालिक सैन्य खरीदारी और अत्याधुनिक तकनीक का भविष्य

सैन्य सहायता के इस पुनर्गठन से इजराइली सेना की दीर्घकालिक खरीद योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं. इजराइल ने वर्ष 2028 के बाद के दशक के लिए F-35, F-16 और F-15 लड़ाकू विमानों की खरीद का बजट बना रखा है. हालांकि, नए 2027 NDAA मसौदे में इजराइल के लिए 750 मिलियन डॉलर निर्धारित किए गए हैं, जिसमें संयुक्त मिसाइल रक्षा प्रणाली, ड्रोन-रोधी प्रणाली, भूमिगत संचालन और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए राशि शामिल है. 

इसके अलावा, ड्रोन, वायु रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर संयुक्त अनुसंधान के लिए एक विशेष कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान है, जिसे पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों के फैसलों को ओवररूल करने का अधिकार होगा.

अमेरिकी संसद का राजनीतिक समीकरण और पारित करने की होड़

अमेरिकी संसद के नए कार्यकाल में प्रोग्रेसिव नेताओं और पारंपारिक इजराइल-समर्थक सांसदों के बीच इस सहायता को लेकर मतभेद गहराने की आशंका है. इस संभावित विधायी गतिरोध को देखते हुए, वर्तमान रिपब्लिकन बहुमत वाली निवर्तमान संसद वर्ष के अंत से पहले ही इस अधिनियम को पारित कराने की कोशिश में जुटी है. संसद की सशस्त्र सेवा समितियों के पास भी इस विधेयक को जल्द पास कराने की अपनी वजहें हैं, ताकि सैन्य संचालन पर संसदीय समितियों के प्रभाव और नियंत्रण को बनाए रखा जा सके.

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