गदी आइज़नकोट को अरब पार्टियों का समर्थन, नेतन्याहू की सत्ता खतरे में
इसराइल में नए सरकार गठन की सुगबुगाहट के बीच बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है. अरब-नेतृत्व वाली जॉइंट लिस्ट और राम (Ra'am) पार्टी के समर्थन के बाद गदी आइज़नकोट का बहुमत के आंकड़े के पार पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है.
नई दिल्ली । डेस्क: इसराइल में आम चुनाव के नतीजों के बाद सरकार बनाने की जोड़-तोड़ और सियासी खींचतान अपने चरम पर पहुंच गई है. देश के राजनीतिक पटल पर एक बड़ा उलटफेर करते हुए अरब-नेतृत्व वाले जॉइंट लिस्ट गठबंधन ने इसराइली विपक्ष के नेता गदी आइज़नकोट का समर्थन करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. गठबंधन ने यह स्पष्ट किया है कि वह राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग को शाम तक गदी आइज़नकोट को ही सरकार बनाने का न्योता देने की सिफारिश सौंपेगा. इससे पहले आठ सीटों वाली अरब-नेतृत्व वाली राम पार्टी ने भी आइज़नकोट के पक्ष में सिफारिश करने की बात कही थी.
67 सांसदों का मजबूत आंकड़ा और नेतन्याहू की बढ़ती मुश्किलें
इस बार के आम चुनाव में 120 सीटों वाली इसराइली संसद (नेसेट) में अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों ने रिकॉर्ड 19 सीटों पर जीत हासिल की है, जिसके चलते नए सरकार के गठन में उनकी भूमिका निर्णायक हो गई है. जॉइंट लिस्ट के 11 सांसदों का औपचारिक पत्र मिलते ही आइज़नकोट के पास कुल 67 सांसदों का समर्थन हासिल हो जाएगा, जो कि बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों के जादुई आंकड़े से कहीं अधिक है.
दूसरी तरफ, निवर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गुट केवल 53 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है. नेतन्याहू के अपने गुट के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है; यूनाटेड टोरा जुडैज्म की 4 सीटों वाले गुट 'डेगेल हातोरह' ने दोनों में से किसी भी उम्मीदवार को समर्थन न देने का मन बनाया है. यह फूट हरेदी समुदाय के पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट देने वाले कानून को पारित कराने में नेतन्याहू गठबंधन की विफलता के कारण आई है.
चुनावी धांधली के आरोप और राष्ट्रपति की कड़ी प्रतिक्रिया
चुनावी नतीजों से बौखलाए बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी ने बिना किसी ठोस सबूत के अरब पार्टियों पर विदेशी मदद से चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया है. लिकुड पार्टी ने विपक्षी गुट का अरब पार्टियों से हाथ मिलाने को 'देशद्रोह' के समान और इसराइल के लिए खतरनाक करार दिया. हालांकि, इसराइल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने धांधली के इन सभी दावों को खारिज करते हुए बुधवार को चुनाव परिणामों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित कर दिया.
राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने भी परिणामों को स्वीकार करते हुए पार्टी नेताओं के साथ बैठकों का दौर शुरू कर दिया है. राष्ट्रपति ने चुनाव में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की जांच का समर्थन करने के साथ-साथ इसराइल के फलस्तीनी नागरिकों के खिलाफ हो रही बयानबाजी की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने देश की 20 प्रतिशत फलस्तीनी आबादी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए हालिया नस्लवादी अभिव्यक्तियों को शर्मनाक बताया.
आगे का रास्ता और सरकार गठन की प्रक्रिया
राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने धार्मिक ज़ियोनिज़्म, ज़ेहुत, शास और यिसराइल बेतेनु जैसे गुटों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत पूरी कर ली है और परामर्श की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. सभी दलों से चर्चा के बाद राष्ट्रपति यह तय करेंगे कि सरकार बनाने का पहला मौका किसे दिया जाए, जिसमें मुख्य मुकाबला नेतन्याहू और आइज़नकोट के बीच ही है. नाम की घोषणा के बाद नामित उम्मीदवार को सरकार बनाने के लिए 28 दिनों का समय मिलेगा, जिसे 14 दिनों के लिए बढ़ाया भी जा सकता है.
कब्जे वाले वेस्ट बैंक के रामल्लाह से आई रिपोर्टों के अनुसार, यदि आइज़नकोट 61 से अधिक वोटों के सहारे अपनी सरकार बनाने में सफल रहते हैं, तो वह इसराइल के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे और नेतन्याहू को विपक्ष में बैठना पड़ेगा.
हालांकि, आइज़नकोट के लिए इन अरब-इसराइली पार्टियों के साथ तालमेल बैठाना एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन सरकार को शपथ दिलाने और इसराइली राजनीति में एक नया अध्याय शुरू करने के लिए उन्हें कम से कम इन पार्टियों से तटस्थ रहने या समर्थन लेने का समझौता करना ही होगा.