शुक्र, 06 नव. 2026

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अमेरिका में सत्ता या राजनीतिक दलों के बदलने से वाशिंगटन की शत्रुता खत्म नहीं होगी- मोजतबा ख़ामेनेई

"अमेरिका की सैन्य अजेयता का भ्रम टूटा" — आयतुल्लाह सय्यद मोजतबा हुसैनी ख़ामेनेई ने स्पष्ट किया कि रियायतों से अमेरिकी दबाव खत्म नहीं होगा, केवल राष्ट्रीय एकजुटता, आत्मनिर्भरता और युवाओं के दृढ़ संकल्प से ही मुकम्मल प्रतिरोध हासिल किया जा सकता है.

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06 नव. 2026, 12:28 AM 3 मिनट में पढ़ें 32

मोजतबा खामेनेई- ईरान के सर्वोच्य नेता
मोजतबा खामेनेई- ईरान के सर्वोच्य नेता

नई दिल्ली । डेस्क: ईरान के इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह सय्यद मोजतबा हुसैनी ख़ामेनेई ने 'राष्ट्रीय वैश्विक साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस और छात्र दिवस' के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए एक कड़ा संदेश जारी किया है. अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की नीतियां और उसका ईरान विरोधी रवैया किसी राजनीतिक दल या प्रशासन के बदलने से प्रभावित नहीं होता. 

उन्होंने आगाह किया कि जो लोग समझौते या रियायतों के माध्यम से वाशिंगटन के दबाव को समाप्त करने की उम्मीद करते हैं, वे बेहद गंभीर भूल कर रहे हैं. अमेरिका का अंतिम उद्देश्य केवल ईरान की स्वतंत्रता को खत्म करना और देश का पूर्ण आत्मसमर्पण कराना है.

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने अमेरिकी आक्रामकता के इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि वाशिंगटन की शत्रुता कोई नई बात नहीं है. इसकी शुरुआत 19 अगस्त 1953 के तख्तापलट से हुई थी, जिसका मुख्य मकसद ईरान के राष्ट्रीय संसाधनों, विशेषकर तेल पर कब्ज़ा जमाना था. 

उन्होंने कहा कि इसके बाद दशकों तक अमेरिका ने पहलवी राजशाही को बनाए रखने और जनता के विरोध को कुचलने के लिए क्रूर सुरक्षा संगठन 'सावाक' की स्थापना में मदद की. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद भी अमेरिकी आक्रामकता थमी नहीं, बल्कि अलगाववादी समूहों का समर्थन, इराक-ईरान युद्ध में सहायता, ईरानी नागरिक विमान को गिराना, कड़े आर्थिक प्रतिबंध और हालिया सैन्य हमलों के जरिए वैज्ञानिकों और नागरिकों की हत्या जैसे रूपों में सामने आई.

फ़ारस की खाड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रमों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हाल की स्थितियों ने अमेरिका की सैन्य अजेयता के मिथक को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने यह बेनकाब कर दिया है कि जो सरकारें अपनी सुरक्षा के लिए अपनी जनता के बजाय विदेशी ताकतों पर निर्भर रहती हैं, वे बेहद कमजोर हैं. 

तीसरे थोपे गए युद्ध के दौरान ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों और होर्मुज जलडमरूमध्य में की गई कार्रवाइयों को उन्होंने अमेरिकी आक्रामकता का एक निर्णायक जवाब बताया. ख़ामेनेई ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कोई नई दुस्साहस की गई, तो उसका जवाब इससे भी अधिक बड़े पैमाने पर दिया जाएगा.

अपने संदेश में उन्होंने मध्य पूर्व के क्षेत्रीय परिदृश्य का जिक्र करते हुए फिलिस्तीन, लेबनान, इराक और यमन के प्रतिरोध आंदोलनों की भूमिका की सराहना की. उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों की बहादुरी, ईरान की राष्ट्रीय एकता और मजबूत सैन्य क्षमता मिलकर एक नई वैश्विक व्यवस्था की नींव रख रही हैं.  

अंत में, उन्होंने देश के युवाओं, विश्वविद्यालय के छात्रों और स्कूली बच्चों को ईरान के स्वर्णिम भविष्य का कर्णधार बताया. उन्होंने युवाओं से निराशा और नकारात्मकता को त्यागकर "हम कर सकते हैं" के आत्मविश्वास को अपनाने की अपील की. 

ख़ामेनेई ने जोर देकर कहा कि पूर्ण सैन्य व रणनीतिक संतुलन हासिल करने का एकमात्र मार्ग एक 'मजबूत ईरान' का निर्माण करना है. इसके लिए राष्ट्रीय एकजुटता, सामाजिक सामंजस्य, व्यावहारिक कौशल और ज्ञान का विकास आवश्यक है, ताकि देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता को हमेशा सुरक्षित रखा जा सके.

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