ईरान युद्ध और महंगाई की मार: 2028 रेस से पहले रिपब्लिकन पार्टी में मंथन
मध्यावधि चुनाव में करारी शिकस्त और टेक्सास जैसे मजबूत गढ़ खोने के बाद रिपब्लिकन पार्टी में मंथन जारी है. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने ईरान युद्ध और महंगाई को इस हार की मुख्य वजह माना है, जिसके बाद 2028 की राष्ट्रपति रेस के समीकरण बदलने लगे हैं.
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों, सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी शिकस्त ने पार्टी के भीतर गहरा संकट पैदा कर दिया है. इस हफ्ते आए मध्यावधि चुनाव के नतीजों में टेक्सास जैसे पारंपरिक रिपब्लिकन गढ़ भी हाथ से निकल गए. इस ऐतिहासिक हार के कुछ ही घंटों बाद पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच यह बहस छिड़ गई है कि आखिर चूक कहां हुई और क्या अब पार्टी को अपनी नीतियों में किसी बड़े बदलाव की सख्त दरकार है.
जेडी वेंस का बड़ा बयान और ट्रंप से दूरी बनाने की रणनीति
हार के तुरंत बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस हार का सबसे बड़ा और मुख्य कारण ईरान युद्ध है. वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति ने खुद भी इस बात को स्वीकार किया है. उन्होंने पूर्व रिपब्लिकन मतदाताओं के पाला बदलने की वजह ईरान में छिड़ी जंग और इजराइल के साथ अमेरिका के संबंधों को बताया. पर्दे के पीछे लंबे समय से इस संघर्ष के प्रति संशय जताते रहे वेंस अब खुले तौर पर खुद को इस युद्ध से अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन नामांकन के प्रमुख दावेदार माने जा रहे वेंस के लिए यह कदम बेहद जरूरी था. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रहते हुए पूरी तरह से उनसे दूरी बनाना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है.
'जहरीला प्याला' बना ईरान युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद तेहरान ने होर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया था, जहां से दुनिया का लगभग 25 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार गुजरता है. इस कदम ने दुनिया भर में ईंधन की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया. मार्च और अप्रैल के महीनों में ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा था. हालांकि रिपब्लिकन हार के बाद नए सैन्य हमलों की संभावना कम होने की उम्मीद में तेल की कीमतें गिरकर 93.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं, लेकिन अमेरिकी जनता के लिए यह राहत काफी देर से आई है.
अमेरिका में लोग पहले से ही पेट्रोल, डीजल और खाने-पीने की महंगी चीजों की वजह से भारी दबाव झेल रहे हैं. ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापारिक शुल्कों (टैरिफ) ने रोजमर्रा की वस्तुओं को और महंगा बना दिया है. इस चौतरफा आर्थिक मार ने ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव और उनकी नीतियों पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.
2028 की रेस: रुबियो, क्रूज़ और देसांतियों के सामने नई चुनौतियां
2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए भले ही अभी किसी नेता ने औपचारिक रूप से उम्मीदवारी की घोषणा न की हो, लेकिन अंदरूनी हलचल तेज हो गई है. हालिया पोल के मुताबिक जेडी वेंस 40 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे आगे हैं, जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर 21-21 प्रतिशत के साथ बराबरी पर हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जो भी नेता 2028 में उतरेगा, उसे ट्रंप के अलोकप्रिय फैसलों से दूरी बनानी ही होगी. मार्को रुबियो के पास पार्टी के पारंपरिक रूढ़िवादी मतदाताओं को जोड़ने का बेहतर मौका माना जा रहा है.
दूसरी ओर, टेक्सास के सीनेटर टेड क्रूज़ ने चुनाव परिणामों को "ब्लू सुनामी" करार देते हुए कहा कि महंगाई और लंबा खींचता ईरान युद्ध जनता के गुस्से की मुख्य वजह बने. हालांकि, युद्ध की शुरुआत में इसका समर्थन करने के कारण क्रूज़ के लिए भी इससे पल्ला झाड़ना आसान नहीं होगा. वहीं, फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन देसांतियों ने इन नतीजों को पार्टी के लिए बेहद खतरनाक बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी टेक्सास जैसे राज्यों को नहीं बचा पाती, तो राष्ट्रीय स्तर पर उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा.