महंगाई और कम वेतन के खिलाफ फ्रांस में फूटा जनआक्रोश, सड़कों पर उतरे लाखों प्रदर्शनकारी
फ्रांस में न्यूनतम वेतन बढ़ाने और महंगाई पर लगाम लगाने की मांग को लेकर लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे. हिंसक झड़पों और पुलिस की ओर से दागे गए आंसू गैस के गोलों के बीच देश के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारक बंद रहे.
नई दिल्ली । डेस्क: पेरिस से लेकर देश भर में बढ़ती महंगाई, कम वेतन और जीवन-यापन के बिगड़ते हालात के खिलाफ अभूतपूर्व प्रदर्शन देखने को मिला है. फ्रांस आंतरिक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में आयोजित लगभग 200 प्रदर्शनों में करीब 6 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जिसके बाद राजधानी पेरिस में एक विशाल मार्च निकाला गया. इस व्यापक हड़ताल का सीधा असर देश के प्रमुख स्मारकों पर भी पड़ा, जिसके कारण एफिल टॉवर और आर्क डी ट्रियोम्फ को दिन भर के लिए पूरी तरह बंद रखना पड़ा.
हड़ताल में शामिल हुए प्रमुख क्षेत्र और मांगें
शिक्षा, रेलवे, अस्पताल और डाक यूनियनों के आह्वान पर शुरू हुए इस आंदोलन में समाज के हर वर्ग ने हिस्सा लिया है. राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि लगभग 16 प्रतिशत शिक्षक इस हड़ताल में शामिल हुए. आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में न्यूनतम वेतन में वृद्धि, सभी कर्मचारियों के लिए वेतन बढ़ोत्तरी, कर सुधार और स्कूलों की स्थिति में सुधार शामिल है. यूनियनों का मानना है कि यह लड़ाई कर्मचारियों की जीत और अधिकारों की सीमा तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
छात्रों का जुड़ाव और बढ़ता सामाजिक असंतोष
सितंबर महीने से सार्वजनिक उच्च विद्यालयों की खराब स्थिति को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब देशव्यापी व्यापक असंतोष में बदल चुका है. सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक 81 उच्च विद्यालयों में नाकेबंदी दर्ज की गई, जबकि छात्र संघों ने 1,000 स्कूलों में कक्षाएं बाधित होने का दावा किया.
सड़कों पर उतरे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक का कहना है कि समाज में संसाधन मौजूद हैं लेकिन वे कुछ हाथों में सिमटे हुए हैं. ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण आम जनता का बजट बिगड़ चुका है, जिससे युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
सुरक्षा व्यवस्था, हिंसा और अंतरराष्ट्रीय असर
प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर हिंसक घटनाएं भी सामने आई हैं. ल्यों में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों के एकत्र होने के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाहनों में आगजनी की घटनाएं हुईं. नांतेस और टूलूज़ के पास भी स्कूलों के बाहर आगजनी दर्ज की गई.
देश भर में तैनात 70,000 पुलिसकर्मियों के साथ सरकार ने उपद्रवियों पर कड़े रुख का आश्वासन दिया है, वहीं पुलिस की कथित बर्बरता की आलोचना के बीच आंतरिक जांच भी जारी है. इस देशव्यापी उथल-पुथल का असर अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर भी पड़ा है, जिसके चलते मार्सिले में प्रस्तावित जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक को ऐन मौके पर पेरिस स्थानांतरित करना पड़ा.