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चीन ने US को कहा-‘दुनिया का पुलिसमैन बनने का भ्रम छोड़े’

चीन ने US को कहा—‘दुनिया का पुलिसमैन बनने का भ्रम छोड़े’, रूस भी बोला अंतर्राष्ट्रीय डकैती

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06 जन. 2026, 12:03 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

सुन लेई- चीन
सुन लेई- चीन

न्यूयॉर्क । डेस्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक में अमेरिका और चीन के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिली. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की अमेरिका द्वारा गिरफ्तारी को लेकर चीन ने वाशिंगटन पर अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संप्रभुता के सिद्धांतों को खुलेआम कुचलने का गंभीर आरोप लगाया. 


चीन ने अमेरिका से मादुरो दंपती को तुरंत रिहा करने की मांग करते हुए कहा कि कोई भी देश खुद को दुनिया का “पुलिसमैन और अंतरराष्ट्रीय अदालत” नहीं मान सकता.

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संयुक्त राष्ट्र में चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई एकतरफा, अवैध और दबंग प्रवृत्ति का उदाहरण है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने न केवल वेनेजुएला की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन किया है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक चिंताओं को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया है. 


सुन लेई के मुताबिक, अमेरिका लगातार आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप, शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों की अवहेलना और सैन्य बल के प्रयोग के जरिए वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बनता जा रहा है.


चीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वेनेजुएला एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है, जिसे अपनी राष्ट्रीय गरिमा और सत्ता की रक्षा करने का पूरा अधिकार है. सुन लेई ने अमेरिका से वेनेजुएला की सरकार को “उखाड़ फेंकने” की नीति छोड़ने, राजनीतिक समाधान अपनाने और राष्ट्रपति मादुरो व उनकी पत्नी की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने की अपील की.


अमेरिका की ओर से संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने चीन और अन्य देशों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई सैन्य या कूटनीतिक हस्तक्षेप नहीं, बल्कि एक वैध कानून प्रवर्तन कार्रवाई थी. 


उन्होंने दावा किया कि मादुरो वैध राष्ट्रपति नहीं हैं और उनके खिलाफ नशीले पदार्थों की तस्करी तथा हथियारों से जुड़े गंभीर आरोप दशकों से लंबित थे. वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिकी अदालत में खुले तौर पर सबूत पेश किए जाएंगे और यह कार्रवाई अमेरिकी नागरिकों को “नार्को-टेररिज़्म” से बचाने के लिए जरूरी थी.


अमेरिका के इस रुख के खिलाफ रूस भी खुलकर चीन के साथ खड़ा हो गया. संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत वासिली नेबेन्ज़िया ने अमेरिका की कार्रवाई को “अंतर्राष्ट्रीय डकैती” करार देते हुए कहा कि वाशिंगटन ने काराकास में कानूनहीनता और अराजकता फैलाई है. 


उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका का असली मकसद वेनेजुएला के विशाल प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना है और इस उद्देश्य के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है.


संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने भी इस घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई. एक लिखित बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई से वेनेजुएला में अस्थिरता और बढ़ सकती है, जिसका असर पूरे लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र पर पड़ेगा. 


उन्होंने चेतावनी दी कि यह घटना देशों के बीच संबंधों के संचालन के तरीके के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकती है.


यह आपात बैठक कोलंबिया के अनुरोध पर बुलाई गई थी, जिसे चीन और रूस का समर्थन मिला. 


कोलंबिया की संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि लियोनोर ज़ालाबाता टोरेस ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय विवादों और शक्ति संघर्षों की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ती है. उन्होंने सभी पक्षों से संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता अपनाने की अपील की.


कुल मिलाकर, मादुरो की गिरफ्तारी ने न केवल अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भी एक बार फिर वैश्विक शक्ति संघर्ष का अखाड़ा बना दिया है, जहां संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और विश्व व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP