रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

ग्रीनलैंड चाहिए ट्रंप को, डेनमार्क के पीएम ने कहा धमकी देना बंद करें

C

CG Khabar

05 जन. 2026, 03:11 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

मेटे फ्रेडरिकसन
मेटे फ्रेडरिकसन

नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक बयान देकर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा रहे हैं. उन्होंने साफ कहा है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड चाहिए और यह अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है. ट्रंप के इस रुख के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या वे वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड के लिए भी सैन्य विकल्प पर विचार कर सकते हैं.


रविवार को राष्ट्रपति के विशेष विमान एयर फोर्स वन में बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है. राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिये से यह हमारे लिए बेहद अहम है.” उन्होंने दावा किया कि ग्रीनलैंड के आसपास रूसी और चीनी जहाजों की आवाजाही बढ़ रही है, जो अमेरिका के लिए खतरे का संकेत है.

विज्ञापन


ट्रंप के इस बयान पर ग्रीनलैंड के ‘अभिभावक’ देश डेनमार्क ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सीधे शब्दों में कहा कि वे अपने करीबी सहयोगियों को धमकाना बंद करें. 


उन्होंने कहा, “अमेरिका हमारा पुराना और करीबी साझेदार है, लेकिन साझेदारों को इस तरह की धमकियां नहीं दी जातीं.” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो देश और वहां के लोग साफ कह चुके हैं कि वे बिकाऊ नहीं हैं, उन्हें डराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.


डेनमार्क अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन नाटो का सदस्य है और दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं. इस पूरे विवाद पर नाटो के एक और अहम सदस्य जर्मनी ने भी प्रतिक्रिया दी है. जर्मनी ने संकेत दिया है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर नाटो के अन्य सदस्य देशों के साथ चर्चा हो सकती है.


करीब 56 हजार की आबादी वाला ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन से लगभग 3000 किलोमीटर दूर स्थित है. बीते करीब 300 वर्षों से यह डेनमार्क के नियंत्रण में है. हालांकि द्वीप को आंतरिक मामलों में स्वायत्तता मिली हुई है, लेकिन विदेश नीति और रक्षा से जुड़े फैसले डेनमार्क सरकार ही लेती है.


गौरतलब है कि दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप बीते 11 महीनों में कई बार ग्रीनलैंड को लेकर चेतावनी दे चुके हैं. पिछले साल चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात कही थी. सत्ता में वापसी के बाद उन्होंने बल प्रयोग की संभावना का संकेत भी दिया था, जिस पर उस समय डेमोक्रेटिक पार्टी ने तीखा विरोध जताया था.


अब एक बार फिर ट्रंप के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और नाटो देशों के बीच तनाव का बड़ा मुद्दा बन सकता है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP