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जन अदालत लगाकर आदिवासी युवक की हत्या

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Hupendra Sharma

19 अग. 2025, 02:18 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

 ग्रामीण की हत्या
ग्रामीण की हत्या

कांकेर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में माओवादियों की बर्बरता एक बार फिर सामने आई है. छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के बिनागुंडा गांव में सोमवार की देर रात माओवादी संगठन ने कथित जनअदालत लगाकर एक आदिवासी युवक की हत्या कर दी.


माओवादियों ने युवक को पुलिस का मुखबिर करार देते हुए सैकड़ों ग्रामीणों के सामने मौत की सजा सुनाई और निर्ममता से उसकी हत्या कर दी. इस घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है.

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ग्रामीणों के मुताबिक, बिनागुंडा गांव के मनेश नुरुटी को सोमवार रात हथियारबंद माओवादियों ने उसके घर से उठाया.


गांव के बीचोंबीच पहले से ही ग्रामीणों को बैठक के बहाने इकट्ठा किया गया था. वहां पहुंचकर माओवादियों ने दो अन्य आदिवासी युवकों की पिटाई की और उन पर भी पुलिस को जानकारी देने का आरोप लगाया.


इसके बाद माओवादियों ने मनेश नुरुटी को पुलिस का मुखबिर बताते हुए कथित जनअदालत में मौत की सजा सुनाई और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी.


बैनर लगाकर ली जिम्मेदारी

घटना के बाद परतापुर एरिया कमेटी ने इलाके में बैनर लगाकर हत्या की जिम्मेदारी ली है.


बैनर के जरिए माओवादियों ने पखांजूर थाना प्रभारी लक्षण केंवट और अन्य पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे आदिवासियों को जबरन पुलिस का गोपनीय सैनिक बनाकर काम करवा रहे हैं.


साथ ही माओवादियों ने कोंगे पंचायत के सरपंच रामजी धुर्वा, डीआरजी के जोयो, बुद्धु, आयतू, टुब्बा कोरेटी, धनी और अर्जून ताती को मौत की सजा देने की धमकी दी है.


ग्रामीणों में दहशत, बढ़ा तनाव

मारे गए युवक मनेश नुरुटी का परिवार खेती-किसानी से गुजर-बसर करता था. ग्रामीण बताते हैं कि मनेश गांव की बुनियादी समस्याओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाता था.


पिछले कुछ समय से वह पुलिस और माओवादी दोनों के दबाव में था और इसी कारण गांव से बाहर भी रह रहा था.


उसकी हत्या से बिनागुंडा और आसपास के गांवों में भय का माहौल है. लोग खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं.


पुलिस की चुनौती और सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर से क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.


नक्सली खुलेआम कथित जनअदालत लगाकर हत्या कर रहे हैं और बैनर लगाकर अपनी गतिविधियों की घोषणा भी कर रहे हैं.


बावजूद इसके पुलिस और सुरक्षा बलों के खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लग पाई.


स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे माओवादी और पुलिस दोनों के बीच पिस रहे हैं.


एक ओर पुलिस मुखबिरी का शक करती है तो दूसरी ओर नक्सली ग्रामीणों पर आरोप लगाकर उन्हें मौत के घाट उतार देते हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP