सुंदरगढ़ के जंगलों में ‘बाघ’ के प्रवेश की चेतावनी
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ वन विभाग ने ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के लेफ्रीपाड़ा क्षेत्र में गोमर्दा वन्यजीव अभयारण्य से एक संदिग्ध बाघ के प्रवेश की सूचना दी है. इसके बाद, सुंदरगढ़ वन मंडल को सतर्क रहने और कैमरा ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है.
वन अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय लोगों को जंगल में न जाने और अपने मवेशियों को चराने के लिए न छोड़ने की सलाह दी गई है.
उजलपुर वन रेंज में शुक्रवार को तीन अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं.
मुख्य वन्यजीव वार्डन (ओडिशा), प्रेम कुमार झा ने कहा, "मैंने डीएफओ को कैमरा ट्रैप लगाने के लिए कहा है ताकि यह पुष्टि हो सके कि जानवर बाघ है. पगमार्क कभी-कभी भ्रामक हो सकते हैं. लोग कहते हैं कि उन्होंने पगमार्क देखे हैं, लेकिन इसकी पुष्टि होनी बाकी है."
लेफ्रीपाड़ा जंगल में वन अधिकारियों की गश्त भी बढ़ा दी गई है. उनका अनुमान है कि बाघ उजलपुर रेंज में भी जा सकता है.
छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, सुधीर अग्रवाल ने कहा, "हमें यकीन नहीं है, लेकिन संदेह है कि एक बाघ आया है. अलर्ट जारी करना इंसानों के साथ संघर्ष को रोकने और जानवर व लोगों दोनों को बचाने में मदद करता है. रायगढ़, सुंदरगढ़ के करीब है, इसलिए जानवर ओडिशा के जंगल में आया होगा. पहले, छत्तीसगढ़ के अचानकमार अभयारण्य से एक बाघ डेब्रीगढ़ आया था, जहां वह लगभग एक साल तक रहा, फिर आगे बढ़ गया. बाद में उसे छत्तीसगढ़ के एक जंगल में मृत पाया गया."
हेमगिरी के रेंज अधिकारी, पी. नाइक ने कहा, "हम सतर्क हैं. बाघ के प्रवेश की जानकारी मिलने के बाद से हम लगातार जंगल में गश्त कर रहे हैं. अभी तक हमें बाघ दिखाई नहीं दिया है."
उजलपुर के रेंज अधिकारी, देबदत्त नंदा ने कहा, "हम नियमित रूप से गश्त कर रहे हैं ताकि पगमार्क का पता लगाया जा सके, लेकिन हमें अभी तक अठकोशिया आरक्षित वन में कोई पगमार्क नहीं मिला है. गुरुवार को हमने अठकोशिया जंगल में पांच कैमरे लगाए थे, और शुक्रवार को तीन और कैमरे लगाए गए हैं ताकि बाघ की गतिविधियों को कैद किया जा सके."
पिछले साल हेमगिरी जंगल में एक मेलानिस्टिक तेंदुआ कैमरा ट्रैप में कैद हुआ था, जो छह साल बाद फिर से दिखा. इसे भी छत्तीसगढ़ से आया हुआ माना गया था.