महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का कार्यकाल 9 महीने बढ़ा
भुवनेश्वर । डेस्क: केंद्र सरकार ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी के जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए गठित 'महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण' (MWDT) के कार्यकाल को 9 महीने के लिए और बढ़ा दिया है. अब यह न्यायाधिकरण 13 जनवरी 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट और निर्णय प्रस्तुत कर सकेगा.
जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, न्यायाधिकरण का मौजूदा कार्यकाल 13 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा था, जिसे अब विस्तारित किया गया है.
यह निर्णय ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों की संयुक्त सिफारिश पर लिया गया है. दोनों सरकारों ने दलील दी थी कि कोविड-19 महामारी और नौ महीने तक अध्यक्ष का पद खाली रहने के कारण न्यायाधिकरण की कार्यवाही प्रभावित हुई थी, जिसके चलते काम पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस विस्तार से न्यायाधिकरण को बिना किसी बाधा के सुनवाई जारी रखने और एक ठोस समाधान तक पहुंचने में मदद मिलेगी.
उल्लेखनीय है कि महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन साल 2018 में हुआ था.
ओडिशा सरकार ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ द्वारा नदी के ऊपरी हिस्से में कई बैराज बनाए जाने से निचले इलाकों में पानी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है.
फिलहाल न्यायाधिकरण के सदस्य दोनों राज्यों में महानदी से जुड़े क्षेत्रों का जमीनी दौरा कर चुके हैं. जहां एक ओर कानूनी सुनवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर दोनों राज्य बातचीत के जरिए भी विवाद का समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं.