तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री और उनके कैबिनेट
ढाका । डेस्क: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान को मंगलवार को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई. यह बांग्लादेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि 2024 में हुई घातक छात्र-नेतृत्व वाली विरोध प्रदर्शनों के बाद यह पहली चुनी हुई सरकार है, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका था.
बीएनपी ने पिछले सप्ताह हुए संसदीय चुनावों में भारी बहुमत हासिल किया था. तारिक रहमान की अगुवाई वाली गठबंधन ने जातिय संसद में 212 सीटें जीतीं, जबकि मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन को 77 सीटें मिलीं. चुनाव 12 फरवरी को हुए थे और यह 2024 की क्रांति के बाद पहला लोकतांत्रिक चुनाव था.
मंगलवार को राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई. संसद भवन के बाहर आयोजित समारोह में सांसदों ने भी राष्ट्र के प्रति निष्ठा की शपथ ली. मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने सांसदों को शपथ दिलाई.
इसके बाद ढाका में एक अलग समारोह में 25 पूर्ण मंत्रियों ने शपथ ली. कैबिनेट में अधिकांश मंत्री बीएनपी और उसके निकट सहयोगियों से चुने गए हैं. राज्य मंत्रियों में 2024 के विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख चेहरों नुरुल हक और जोनायद साकी को शामिल किया गया है, जो पहली बार सांसद बने हैं. हालांकि मंत्रालयों का बंटवारा अभी अंतिम रूप से घोषित नहीं हुआ है.
नए कैबिनेट सदस्यों का परिचय
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर
बीएनपी के महासचिव आलमगीर (78) ठाकुरगांव-1 सीट से चुने गए. वे 2001-2006 में खालिदा जिया सरकार में कृषि और नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री रह चुके हैं. 2023 में हसीना सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया था. चुनाव जीत के बाद उन्होंने बीएनपी को "जनता की पार्टी" बताया.
अमीर खसरो महमूद चौधरी
चटगांव-11 से चुने गए चौधरी 2001-2004 में वाणिज्य मंत्री रह चुके हैं. वे बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य हैं. चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि बीएनपी स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास में निवेश करेगी तथा कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्योगों को क्रेडिट और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच प्रदान करेगी.
इकबाल हसन महमूद टुकू
सिराजगंज-2 से चुने गए टुकू (75) बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य हैं. वे कई बार सांसद रह चुके हैं और 2001-2006 में विद्युत राज्य मंत्री तथा कृषि राज्य मंत्री रहे. 2007 में सैन्य समर्थित सरकार में भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें 9 साल की सजा हुई थी, लेकिन सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया.
खलिलुर रहमान
यह तकनीकी मंत्री हैं, जो पार्टी राजनीति के बजाय विशेषज्ञता के आधार पर शामिल किए गए. वे संसद सदस्य नहीं हैं. उन्होंने मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रोहिंग्या मुद्दे पर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम किया.
अफरोजा खानम रीता
कैबिनेट में एकमात्र महिला मंत्री रीता पहली बार सांसद बनी हैं. उनके पिता चार बार सांसद रह चुके थे. वे मोन्नो ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की चेयरपर्सन हैं, जो सिरेमिक, टेक्सटाइल और कृषि मशीनरी का निर्यात करती है.
असदुज्जमान
झेनाइदाह-1 (शैलकुपा) से चुने गए असदुज्जमान कैबिनेट में शामिल हैं.
दीपेन देवान
रंगामाटी से चुने गए चाकमा बौद्ध नेता देवान (62) को चटगांव हिल ट्रैक्ट्स मामलों का मंत्री बनाए जाने की उम्मीद है. चाकमा बांग्लादेश के आदिवासी समुदाय से हैं.
निताई रॉय चौधरी
हिंदू नेता चौधरी (77) सांस्कृतिक मामलों के मंत्री बनने की संभावना है. वे बीएनपी के वरिष्ठ सलाहकार और रणनीतिकार हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि 2024 के युवा-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद ये नियुक्तियां गहन जांच के दायरे में रहेंगी. इंडिपेंडेंट यूनिवर्सिटी, बांग्लादेश के व्याख्याता खंदकर ताहमिद रेजवान ने कहा कि मंत्रियों को पिछली सरकारों से बेहतर प्रदर्शन साबित करना होगा. उन्होंने कहा कि पुरानी पीढ़ी के वर्चस्व के बजाय युवा, महिला, जातीय और धार्मिक विविधता वाली नई छवि दिखानी चाहिए. हालांकि छात्र-नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी ने जमात से गठबंधन किया, जिसे रणनीतिक गलती माना जा रहा है.
समारोह में कई विदेशी प्रतिनिधि मौजूद थे. मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे, भारत के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल शामिल थे. नेपाल, ब्रिटेन, चीन, सऊदी अरब, तुर्की, यूएई, कतर और ब्रुनेई के प्रतिनिधि भी आमंत्रित थे.
यह नई सरकार बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली और आर्थिक सुधार की उम्मीद जगाती है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं.