निलंबित CEO रूपेश पांडेय मिले भूपेश बघेल से, हाईकोर्ट जाने की तैयारी
दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) रूपेश कुमार पांडेय के निलंबन के बाद सियासी पारा चढ़ गया है. सुशासन तिहार के दौरान भाजपा नेता से हुई तीखी नोकझोंक के बाद संभाग आयुक्त ने रूपेश पांडेय को आचरण संबंधी गड़बड़ी के आरोप में सस्पेंड कर दिया था.
इस कार्रवाई के ठीक बाद निलंबित सीईओ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात करने पहुंचे, जिसका वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि इस मुलाकात ने साबित कर दिया है कि अधिकारी निष्पक्ष होकर काम नहीं कर रहे थे.
हालांकि, रूपेश पांडेय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे एक महज औपचारिक शिष्टाचार भेंट बताया है. उनका कहना है कि वे पूर्व में पाटन में पदस्थ रहे हैं, जिसके कारण पूर्व मुख्यमंत्री से उनका पुराना परिचय है और इस मुलाकात का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है.
निलंबन की इस गाज के बाद रूपेश पांडेय ने विभागीय कार्रवाई को पूरी तरह एकपक्षीय और राजनीति से प्रेरित बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है और सोशल मीडिया पर वायरल किया गया वीडियो अधूरा है. उनके मुताबिक, ५५ सेकेंड के पूरे घटनाक्रम में से सिर्फ ७ सेकेंड का हिस्सा ही दिखाया गया, जिसमें केवल उनकी प्रतिक्रिया शामिल है, जबकि उससे पहले भाजपा नेताओं द्वारा उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था.
पांडेय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ 'तमीज से बात करने' को कहा था. उन्होंने कहा कि संभाग आयुक्त के समक्ष अपना पक्ष रखने के बावजूद उसे नजरअंदाज कर दिया गया. अब वे इस एकपक्षीय कार्रवाई के विरोध में सबसे पहले मुख्य सचिव के पास अपनी अपील दर्ज कराएंगे और यदि वहां से न्याय नहीं मिला, तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.
इस पूरे विवाद की जड़ में भाजपा नेताओं के खिलाफ चल रहे वसूली के मामले और एक सामुदायिक भवन के निर्माण की राशि का विवाद है. निलंबित सीईओ ने खुलासा किया कि अंडा-निकुम मंडल के भाजपा महामंत्री पुराण देशमुख और उनकी पूर्व सरपंच पत्नी के खिलाफ लाखों रुपये की सरकारी राशि की वसूली के मामले लंबित हैं.
जिस सामुदायिक भवन की राशि जारी करने को लेकर थनौद के जनसमस्या निवारण शिविर में विवाद खड़ा किया गया था, उस पर नायब तहसीलदार की कोर्ट ने जनवरी २०२५ में ही स्टे हटा दिया था. स्टे हटने के बाद नियमानुसार ही राशि का भुगतान किया गया था, जिससे नाराज होकर भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ माहौल बनाया.
फिलहाल, प्रशासन ने रूपेश पांडेय के निलंबन के बाद दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार जिला पंचायत के प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी महेंद्र कुमार जांगड़े को सौंप दिया है.