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सरगुजा: गर्भवती प्रेमिका को प्रेमी ने मारा, अजन्मे बच्चे की भी मौत

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10 नव. 2025, 11:22 AM 3 मिनट में पढ़ें 3

हत्यारा गिरफ्तार
हत्यारा गिरफ्तार

अंबिकापुर । संवाददाता: सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र में नशे के नशे में चूर एक युवक ने अपनी लिव-इन पार्टनर को क्रूरता से पीट-पीटकर मार डाला, जिसमें सात माह के गर्भ में पल रहे उनके नवजात की भी जान चली गई. यह सनसनीखेज वारदात बीते शुक्रवार को ग्राम जजगा में घटी, जब प्रेमी की नाराजगी ने हिंसा का कुरूप रूप धारण कर लिया.


दोनों के बीच ढुकू प्रथा के तहत दो साल से साथ रहने का रिश्ता था, जो आदिवासी समाज में घर बसाने की परंपरा मानी जाती है. 30 वर्षीय राजीव दास महंत ने गांव में ही एक छोटी किराना दुकान खोल रखी थी, जिसका संचालन अक्सर 28 वर्षीय मनबसिया माझी भी संभालती. लेकिन राजीव की शराब की लत ने इस रिश्ते को जहर घोल दिया था. लगातार होने वाले झगड़ों से तंग आकर मनबसिया ने घटना से एक दिन पहले बिना बताए मायके की राह पकड़ ली थी.

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लौटते ही राजीव को खाली घर और दुकान मिली, जिससे उसके मन में संदेह और गुस्से की आग भड़क उठी. पड़ोसियों पर भी इल्जाम लगाया कि वे मनबसिया को उसके खिलाफ उकसा रहे हैं. इसी जलन में वह दो किलोमीटर पैदल ससुराल पहुंचा और बहला-फुसलाकर उसे वापस ले आया. घर आते ही शुरू हो गया अमानवीय अत्याचार. पहले बाहर डंडे से मारपीट, फिर बंद कमरे में बेरहमी की हद पार. बेहोश हो चुकी मनबसिया को वहीं लॉक कर भाग निकला आरोपी.


रात गहराने तक घर से सन्नाटा छाया रहने पर सतर्क पड़ोसियों ने हेल्पलाइन 112 पर फोन किया. मौके पर पहुंची 112 और 108 की टीम ने ताला तोड़कर अंदर दाखिल होते ही भयानक मंजर देखा मनबसिया खून से लथपथ मृत पड़ी थीं. पोस्टमॉर्टम में डॉक्टरों को उनके शरीर पर 40 से ज्यादा डंडे के घावों के निशान मिले, जबकि गर्भ से निकाले गए शिशु की भी मौत की पुष्टि हुई.


पुलिस ने दूसरे दिन यानी शनिवार को फरार राजीव को धर दबोचा और कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया. यह घटना न केवल प्रेम के काले पक्ष को उजागर करती है, बल्कि नशे की लत के खतरनाक परिणामों पर भी सवाल खड़े करती है. स्थानीय प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है, ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न दोहराए.


ढुकू प्रथा क्या है


छत्तीसगढ़ और झारखंड के आदिवासी समुदायों, विशेषकर सरगुजा (अंबिकापुर) जिले में प्रचलित ढुकू प्रथा एक पारंपरिक रिवाज है, जिसमें युवक-युवती आपसी सहमति से बिना किसी औपचारिक विवाह संस्कार के एक साथ रहने लगते हैं. आदिवासी संस्कृति में इसे 'घर में प्रवेश' या लिव-इन रिलेशनशिप के रूप में देखा जाता है, जो परिवार गठन का सरल तरीका माना जाता है.


हालांकि, यह प्रथा अक्सर विवादास्पद रही है, क्योंकि इससे बच्चों को कानूनी मान्यता न मिलना, नाबालिग विवाह जैसी समस्याएं और पार्टनरों का आसानी से अलगाव जैसी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं. कई एनजीओ इस कुप्रथा को समाप्त करने के प्रयासरत हैं, ताकि आदिवासी परिवारों का कल्याण सुनिश्चित हो.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP